Semiconductor in India: एआई का बढ़ता दायरा अब लोगों के लिए अनुकूल होता जा रहा है। अब एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कारों को भी मॉडर्न बना रहा है। जी हां, आपने गाड़ी में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन देखा होगा, उस तकनीक के पीछे एआई और चिप अहम भूमिका निभाते हैं। भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी लाने में कारों की चिप काफी अहम योगदान दे सकती है। ऐसे में सवाल यह है क्या चिप के बिना कोई भी मॉडर्न कार अधूरी है? एआई का बढ़ता इस्तेमाल और कारों की चिप से सेमीकंडक्टर सेक्टर को कैसे फायदा हो सकता है? आइए नीचे जानने का प्रयास करते हैं।
Semiconductor in India: मॉडर्न कारों के लिए कितनी जरूरी है चिप?
जानकारी के लिए बता दें कि कार में कई तरह से चिप्स का इस्तेमाल होता है। गाड़ी के इंजन में, इंजन कंट्रोल यूनिट के तौर पर, फ्यूल इंजेक्शन, माइलेज और परफॉर्मेंस भी चिप से नियंत्रित होती है। साथ ही कार की सेफ्टी के लिए एयरबैग्स, एबीएस और एडीएएस सिस्टम में भी चिप का अहम रोल होता है। कार की टक्कर से पहले एयरबैग्स खोलने की टाइमिंग को चिप ही कंट्रोल करती है। इसके अलावा, कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम में भी चिप का यूज होता है, जिससे कार का जीपीएस, म्यूजिक और वॉयस कमांड फीचर्स सही तरीके से काम करते हैं।
भारत में सेमीकंडक्टर मार्केट को कैसे मिल सकती है नई रफ्तार
देश में जैसे-जैसे कारों की बिक्री बढ़ रही है, वैसे-वैसे कारों में मॉडर्न खूबियों की मांग में इजाफा हो रहा है। आज के टाइम पर भी कारों में बड़े स्तर पर एआई का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में भविष्य में भी कारों में एआई से जुड़े फीचर्स को बढ़ाया जाएगा। ऐसे में साफ है कि इसके लिए चिप की डिमांड काफी अधिक रहने वाला है। फ्यूचर में चिप ही कारों को सेल्फ ड्राइविंग मोड पर चलाने में मदद करेगी। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण माने जाने वाला एडीएएस सिस्टम पूरी तरह से चिप पर निर्भर होगा।
इससे चिप की मांग बढ़ने की पूरी संभावना है। इसका सीधा प्रभाव भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर देखने को मिल सकता है। कुछ दिनों पहले ही भारत के आईटी मंत्री अश्विणी वैष्णव ने बताया था कि फरवरी तक देश में पहला कमर्शियल चिप प्लांट शुरू हो जाएगा। ऐसे में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार अगले कुछ सालों में अच्छी प्रगति हासिल कर सकता है।