Economic Survey 2026: आम बजट से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। गौरतलब है कि इस रिपोर्ट कार्ड में जीडीपी ग्रोथ, महंगाई दर समेत कई अमुमान शामिल है। हालांकि पिछले साल के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ अच्छा खासा रहने का अनुमान जताया है। इसके साथ ही गौरतलब है कि वैश्विक वातावरण अभी भी नाजुक बना हुआ है, विकास दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है लेकिन बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विखंडन और वित्तीय कमजोरियों के कारण जोखिम बढ़ गए हैं। इन झटकों का असर कुछ समय बाद ही दिखाई दे सकता है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया Economic Survey 2026
बता दें कि आज संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक रिपोर्ट कार्ड पेश किया। जिसमे उन्होंने महंगाई, जीडीपी ग्रोथ को लेकर अहम जानकारी दी। वित्त वर्ष 2026 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि और सकल घरेलू उत्पाद (जीवीएसी) वृद्धि क्रमशः 7.4 और 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भारत के लिए संभावित वृद्धि लगभग 7 प्रतिशत अनुमानित है, जबकि वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8-7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यानि जीडीपी में अच्छी खासी ग्रोथ देखी जा सकती है। देश की आधी आबादी खेती पर निर्भर है। इकोनॉमिक सर्वे में इस बात पर जोर दिया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में एग्रीकल्चर ग्रोथ 3.1% रहने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2026 के लिए क्या रहेगा महंगाई का हाल?
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक- RBI और IMF ने अनुमान जताया है कि आने वाले साल में महंगाई दर धीरे-धीरे बढ़ेगी। यह 4% के तय लक्ष्य (± 2%) के दायरे में बनी रहेगी। कृषि वर्ष 2024-25 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 3577.3 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 254.3 लाख मीट्रिक टन अधिक है। प्रधानमंत्री-किसान योजना की शुरुआत से अब तक पात्र किसानों को ₹4.09 लाख करोड़ से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। यानि इस साल महंगाई दर में बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।
विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि तेज हुई, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में सकल लाभ मूल्य (GVA) 7.72% और दूसरी तिमाही में 9.13% बढ़ा, जो संरचनात्मक सुधार को दर्शाता है। 14 क्षेत्रों में उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश आकर्षित किया है, जिससे सितंबर 2025 तक 18.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त उत्पादन/बिक्री और 12.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।





