H-1B Visa: बता दें कि हर साल करीब 70 प्रतिशत भारतीय H-1B Visa के लिए अप्लाई करते है। लेकिन बीते कुछ महीने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से इस वीजा पर फीसल से लेकर कई तरह के नियमों में बदलाव किया गया था। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े होना शुरू हो गए थे, लेकिन अब अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप को एक तगड़ा झटका देते हुए 1 लाख डॉलर फीस पर बैन लगा दिया है जो एक अच्छी खबर है।
जानकारी के मुताबिक अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले अमेरिकी सांसदों ने एक फ़ेडरल कोर्ट के उस आदेश का समर्थन किया है जिसमें H-1B Visa आवेदन के लिए प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की फ़ीस को रद्द कर दिया गया था; वहीं दूसरी ओर, व्हाइट हाउस इस अदालती फ़ैसले को अपील कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिकी कोर्ट के फैसले से डोनाल्ड ट्रंप हुए आगबबूला
न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक “अमेरिकी राष्ट्रपति ने न्यूयॉर्क में न्यूयॉर्क निक्स और सैन एंटोनियो स्पर्स के बीच NBA फ़ाइनल मैच देखने के बाद, न्यूयॉर्क से रवाना होते समय पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि “ये फ़ेडरल जज सचमुच हमारे लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। कोर्ट सिस्टम में जो कुछ हो रहा है, वह वाकई अजीब है।
वे हमारे देश को बहुत बुरी तरह नुकसान पहुँचा रहे हैं।” हालांकि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले अमेरिकी सांसदों ने वीज़ा आवेदन फ़ीस के प्रस्तावित प्रस्ताव को रद्द करने वाले फ़ेडरल कोर्ट के आदेश का समर्थन किया है, जबकि व्हाइट हाउस इस अदालती फ़ैसले को अपील कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
कोर्ट के इस फैसले से भारतीयों को होगा फायदा
बता दें कि हर साल करीब 70 प्रतिशत भारतीय H-1B Visa के लिए अप्लाई करते है। बता दें कि अमेरिकी टेक कंपनियों में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर और आईटी विशेषज्ञ काम करते हैं। यदि 1 लाख डॉलर की फीस लागू रहती, तो कई कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने से बच सकती थीं।
मालूम हो कि H-1B Visa अमेरिका की उन कंपनियों को विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिन्हें विशेष तकनीकी या पेशेवर कौशल की आवश्यकता होती है।
