RBI Monetary Policy: मीडिल ईस्ट में जारी टेंशन का असर दुनिया के कई देशों में देखने को मिल रहा है। जिसके बाद स्थिति बेहद चिंतजानक हो गई है। भारत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है क्योंकि पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रह है।
वहीं अब RBI Monetary Policy के नतीजे सामने आ चुके है। मीटिंग में रेपो रेट को बिना बदलाव के रखा गया है। यानि पहले की तरह रेपो रेट 5.25 प्रतिशत नहीं रह सकता है। इस वर्ष सीपीआई मुद्रास्फीति 5.1% रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से लगभग 50 आधार अंक अधिक है। यानि महंगाई में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या बोले आरबीआई गवर्नर
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि “वैश्विक उथल-पुथल के इस वर्तमान दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था पिछली समान उथल-पुथलों की तुलना में कहीं बेहतर आधारभूत स्थिति में है। हमें पूरा विश्वास है कि हम इन झटकों को न्यूनतम नुकसान के साथ झेल लेंगे। पिछले कुछ महीनों में, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का स्तर बढ़ गया है, प्रमुख व्यापार मार्गों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आया है, बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और कारोबारी माहौल सतर्क रहा है।
मैं शुरू में ही इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि वैश्विक उथल-पुथल के इस वर्तमान दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था पिछली समान उथल-पुथलों की तुलना में कहीं बेहतर आधारभूत स्थिति में है। हमें पूरा विश्वास है कि हम इन झटकों को न्यूनतम नुकसान के साथ झेल लेंगे।”
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आरबीआई गवर्नर का बड़ा बयान
RBI Monetary Policy में हुई बैठक के बाद नतीजे सामने आ गए है। जिसमे आरबीआई गवर्नर ने कहा कि “वैश्विक झटकों के बावजूद, घरेलू कीमतों पर इसका सीमित प्रभाव पड़ने के कारण CPI मुद्रास्फीति लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। हालांकि, आधारभूत अनुमानों से संकेत मिलता है कि इस वर्ष की तीसरी तिमाही में शीर्ष मुद्रास्फीति ऊपरी सहनशीलता स्तर की ओर बढ़ रही है।
#WATCH | RBI Governor Sanjay Malhotra says, “CPI inflation remains below the target despite global shock as the pass-through to domestic prices has been limited. While the baseline projections point towards headline inflation forming up towards the upper tolerance level in Q3… pic.twitter.com/nckx8iZaP0
— ANI (@ANI) June 5, 2026
आपूर्ति संकट का प्रभाव चौथी तिमाही से कम होने की उम्मीद है। फिलहाल, अंतर्निहित मुद्रास्फीति का दबाव कम बना हुआ है। हालांकि, अपेक्षाओं और वेतन पर द्वितीय दौर के प्रभावों के माध्यम से मुद्रास्फीति के सामान्यीकरण की प्रबल संभावना है, जिस पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है। असामान्य दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वानुमान और अल नीनो के जोखिमों के कारण भी दृष्टिकोण अनिश्चित बना हुआ है”।
