UAE Opec Exit: संयुक्त अरब अमीरात ने एक ऐसा फैसला किया है, जिसने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। बता दें कि इस फैसले के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि क्या यूएई बड़ा खेल करने जा रहा है। दरअसल संयुक्त अरब अमीरात ओपेक से बाहर होने का फैसला लिया है। मालूम हो कि ओपेक एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसमें तेल उत्पादक देश शामिल हैं, और इसका मुख्य काम दुनिया में तेल की कीमतों और उत्पादन को प्रभावित करना है। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। UAE Opec Exit के बाद अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है कि क्या भारत को इससे फायदा होगा?
UAE Opec Exit से दुनिया के कई देशों में हड़कंप
दुनिया की तेल राजनीति में एक बड़ा बदलाव तब देखने को मिलता है जब कोई प्रमुख देश Organization of the Petroleum Exporting Countries (OPEC) से बाहर निकलने की बात करता है। अगर यूएई ऐसा कदम उठाता है, तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
यानि साफ शब्दों में कहें तो संयुक्त अरब अमीरात के बाहर होने से वह अपने हिसाब से तेल बेच सकेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई ओपेक के उत्पादन कोटा से ना खुश था। वह अपना उत्पादन बढ़ाकर ज्यादा कमाई करना चाहता था।
क्या है OPEC?
ओपेक एक अंतरराष्ट्रीय समूह है जिसमें ऐसे देश शामिल हैं जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल (Crude Oil) उत्पादन और निर्यात करते हैं। यह संगठन मिलकर तय करता है कि कितना तेल निकाला जाए और बाजार में सप्लाई कैसे रखी जाए। अगर इसके काम की बात करें तो यह तेल उत्पादन की सीमा को तय करता है।
जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें स्थिर रहती है। इसके अलावा ओपेक एक “तेल क्लब” जैसा है, जहां बड़े तेल उत्पादक देश मिलकर यह तय करते हैं कि दुनिया में कितना तेल बेचा जाए।
क्या यूएई के फैसले से भारत हो होगा फायदा?
बता दें कि UAE Opec Exit की खबर से पूरे दुनिया में हड़कंप मच गया है। वहीं एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या भारत को इससे फायदा पहुंचेगा? गौरतलब है कि भारत और यूएई काफी अच्छे दोस्त है। बाहर होने के बाद यूएई अपने हिसाब से तेल बेच सकेगा। भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है।
जिसकी वजह से कच्चे तेल की खपत भी ज्यादा है। यानि अब भारत यूएई से कम दाम में अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीद सकेगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से भारत को ज्यादा फायदा हो सकता है।






