Economic Survey 2026: देश में आज आर्थिक सर्वेक्षण की चर्चा जोरों पर है। जानकारी के मुताबिक आज 29 जनवरी को संसद में इकॉनामिक सर्वे रिपोर्ट पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे देश के समक्ष रखेंगी। इसको लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। बजट पेश होने से पहले संसद में पेश होने वाले आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2026 को लेकर लोगों के मन में कौतूहल है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में क्या कुछ नया हो सकता है? कैसे बजट के फैसले पर इसका असर पड़ सकता है? ऐसे तमाम सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की जाएगी। साथ ही ये भी बताएंगे कि कैसे इकॉनामिक सर्वे रिपोर्ट पेश की जाती है।
बजट से पहले पेश किए जाने वाले Economic Survey 2026 में क्या हो सकता है नया?
संसद में आज बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की जानी है। इसमें क्या कुछ नया हो सकता है इसको लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक समिति इस वर्ष के इकॉनामिक सर्वे रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.4 फीसदी की मजबूत विकास दर, एआई की भूमिका और सतत विकास पर जोर दे सकती है। इसके साथ ही व्यवसाय क्षेत्र की मजबूती, महंगाई पर नियंत्रण और रोजगार के अवसरों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। संसद में आज बजट सत्र के दौरान पेश किया जाने वाला सर्वे अर्थव्यवस्था पर सरकार की सालाना रिपोर्ट कार्ड की तरह काम करेगा। यह संकेत देगा कि देश अभी किस स्थिति में है और कहां किस पॉलिसी की प्राथमिकताएं देश को आगे बढ़ा सकती हैं।
कैसे सर्वेक्षण रिपोर्ट का बजट के फैसले पर पड़ेगा असर?
सर्वेक्षण रिपोर्ट देश की अर्थव्यवस्था पर सरकार की सालाना रिपोर्ट कार्ड की तरह काम करती है। ये देखने के बाद ये तय करना आसान होता है कि किस क्षेत्र में किन योजनाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत है। आर्थिक सर्वे देश के विभिन्न हिस्सों में कृषि, उद्योग, रोजगार, महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार समेत कई पहलुओं की गहरी समीक्षा करता है। इसके आधार पर नई नीतियां बन सकती हैं और बजट में उन्हें प्राथमिकता दी जा सकती है। ऐसा करते हुए सर्वे रिपोर्ट बजट पर असर डाल सकती है।





