AI in Automotive: गाड़ियों में एआई का भविष्य क्या है? भारत में इससे ऑटो मैन्युफैक्चरिंग को कैसे होगा फायदा, जानें सबकुछ

AI in Automotive: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जिसे शॉर्ट में एआई भी कहते हैं, नाम सुनते या पढ़ते ही सबसे पहले एक हाईटेक टेक्नोलॉजी का ख्याल आता है। अगर हां, तो आप एआई से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। जी हां, एआई आजकल रोजाना के कई कामों में यूज हो रहा है। भारत में चलने वाली कारों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग हो रहा है। कारों में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। ऐसे में अब सेल्फ-ड्राइविंग कारों के जरिए एआई ऑटोमोबाइल मार्केट को बदल सकता है।

AI in Automotive: कारों में एआई का इस्तेमाल और क्या है भविष्य?

कारों में एआई का इस्तेमाल कई तरह से होता है, जिसमें ऑटोनॉमस गाड़ियों के लिए सेंसर को पावर देना और ब्रेकिंग और लेन छोड़ने का अलर्ट जैसी चीजों में मदद करने के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी एडीएएस को एक्टिवेट करना शामिल है।

ऐसे में आने वाले समय में एआई सेंसर, कैमरों और 360 डिग्री सिस्टम से डेटा इकट्ठा करके ऑटोनॉमस ड्राइविंग को सपोर्ट करना जारी रख सकता है। इससे गाड़ियां खुद ही संभावित खतरों की पहचान कर सकेगी। यह कनेक्टेड कारों को रियल टाइम अपडेट भी भेजेगा, जिससे वे सड़क पर दूसरी गाड़ियों के साथ बेहतर और सुरक्षित तरीके से कनेक्ट कर सकेंगी।

ऑटोमोटिव में एआई से मैन्युफैक्चरिंग को होगा फायदा

कारों को चलाने तक ही एआई सीमित नहीं है, बल्कि एआई का इस्तेमाल ऑटो मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा एफिशियंट बनाने के लिए किया जा है। जैसे-इंडस्ट्रियल रोबोट इंसानों के मुकाबले अधिक सटीकता के साथ कारों को असेंबल और पेंट कर सकते हैं। एआई पावर्ड सिस्टम परफॉर्मेंस हिस्ट्री की जांच करके और प्रोडक्शन लाइन पर संभावित समस्याओं का पता लगाने के लिए अहम एनालिटिक्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, दूसरे सिस्टम गाड़ियों को तैयार करने के दौरान गलतियों को पकड़ने के लिए कर्मचारियों के साथ रियल टाइम डेटा शेयर करते हैं। ऐसे में गाड़ियों का प्रोडक्शन बेहतर और कम टाइम में पूरा होता है।

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