Vande Mataram: कश्मीर से नई दिल्ली तक जिस वंदे मातरम को लेकर चर्चाओं का दौर छिड़ा था। उस पर नया अपडेट सामने आ गया है। केन्द्र सरकार ने नए निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि अब से सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ बजना अनिवार्य होगा।
सरकार के नए फैसले के तहत राष्ट्र गान की तरह राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 6 छंद बजाए जाएंगे। इनमें से 4 छंद 1937 में कांग्रेस ने हटा दिए थे। ये सब कुछ ऐसे दौर में हो रहा है जब पूर्व में ही मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद वंदे मातरम को अनिवार्य करने का विरोध कर चुका है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि केन्द्र के निर्देशों के बाद मुस्लिम संगठन आगे क्या करेगा?
विरोध के बीच राष्ट्रीय गीत गायन को लेकर जारी निर्देश से छिड़ी चर्चा
केन्द्र सरकार ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद व अन्य मुस्लिम संगठनों के विरोध के बीच राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक अब किसी भी सरकारी कार्यक्रम, स्कूल और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य होगा। राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह की सभी को खड़ा होकर राष्ट्रीय गीत का गायन करना होगा।
केन्द्र सरकार ने नए निर्देश वंदे मातरम रचना की 150वीं वर्षी पर दिए हैं। वंदे मातरम के जिन 6 छंदों का गायन अनिवार्य है वे इस प्रकार हैं-
1- वन्दे मातरम्।सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।शस्यशामलां मातरम्।शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं।सुखदां वरदां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
2- वन्दे मातरम्। कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले।अबला केन मा एत बले।बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं।रिपुदलवारिणीं मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
3- वन्दे मातरम्। तुमि विद्या, तुमि धर्म।तुमि हृदि, तुमि मर्म।त्वं हि प्राणाः शरीरे।बाहुते तुमि मा शक्ति।हृदये तुमि मा भक्ति।तोमारई प्रतिमा गडि।मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
4- वन्दे मातरम्। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी।कमला कमलदलविहारिणी।वाणी विद्यादायिनी।नमामि त्वाम्।नमामि कमलां अमलां अतुलां।सुजलां सुफलां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
5- वन्दे मातरम्। श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां।धरणीं भरणीं मातरम्।शत्रु-दल-वारिणीं।मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
6- वन्दे मातरम्। त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति।त्वं हि शक्ति मातरम्।वन्दे मातरम्।।
इन उपरोक्त छंदों में दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और सरस्वती जैसी हिंदू देवियों का जिक्र है। 1937 में इन छंदों को नहीं अपनाया गया था जिनका गायन सरकार द्वारा अब अनिवार्य किया गया है।
अब आगे क्या करेगा जमीयत उलेमा-ए-हिंद?
मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद अब आगे क्या कदम उठाता है इस पर सबकी नजरें होंगी। दरअसल, संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान जब सदन में वंदे मातरम पर चर्चा हो रही थी, तभी इस संदर्भ में नए निर्देश लागू होने की सुगबुगाहट मिली थी। उसी दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मुखर तौर पर वंदे मातरम को अनिवार्य करना इस्लाम के खिलाफ बताया था।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने स्पष्ट किया था कि सरकार को ऐसा कुछ भी करने से बचना चाहिए जिससे एक वर्ग विशेष की आस्था को ठेंस पहुंचे। हालांकि, अब केन्द्र द्वारा वंदे मातरम के 6 छंद को अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि मुस्लिम संगठन आगे क्या कदम उठाता है। यदि विरोध होते हैं तो उसका असर क्या होता है।






