‘ज्ञानेश कुमार बीजेपी की कठपुतली..’ आप नेता Anurag Dhanda का मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप, जानें सबकुछ

Anurag Dhanda ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं अब विपक्ष लगातार हमलावर हो गया है।

Anurag Dhanda

फाइल फोटो

Anurag Dhanda: आम आदमी पार्टी के नेता और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी Anurag Dhanda ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयान में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों का जिक्र किया गया। जिसका हवाला देते हुए आप नेता ने गंभीर आरोप लगाया है। इसके अलावा उन्होंने कई तरह के सवाल खड़े किए है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

Anurag Dhanda का मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप

आप नेता Anurag Dhanda ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि “अब ये सबूतों के साथ सबके सामने है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बीजेपी की कठपुतली है।

अगर ज्ञानेश कुमार में थोड़ी भी शर्म है तो उसे तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। और अगर शर्म नहीं है तो इसे हटा दिया जाना चाहिये”। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों का जिक्र किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों पर कम-से-कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।

विपक्ष ने उठाया गंभीर सवाल

आप नेता Anurag Dhanda के अवाला विपक्षी पार्टी चुनाव आयोग पर हमलावर नजर आ रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा कि “ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं।

एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और ख़तरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले”!

 

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