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Bengaluru Water Crisis: बेंगलुरु में पानी पर हाहाकार! जल संकट का क्या है कारण, जानें भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय

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Bengaluru Water Crisis
फाइल फोटो प्रतिकात्मक

Bengaluru Water Crisis: बेंगलुरु गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है, जिससे विभिन्न जगहों पर पानी की कमी हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक के 236 तालुकों में से 223 सूखे से प्रभावित हैं। गौरतलब है कि इसमे बेंगलुरु के पानी के स्रोत मांड्या और मैसूर जिले भी शामिल हैं। वहीं जैसे जैसे गर्मी बढ़ रही है, आंकड़े के मुताबिक आने वाले महीनों में कर्नाटक भर के लगभग 7,082 गांवों में पीने के पानी का संकट पैदा हो सकता है। बता दें कि जल संकट तेजी से शहरीकरण, निर्माण गतिविधियों में वृद्धि, प्रवासन और शहर में बढ़ती आबादी की मांगों को पूरा करने की आवश्यकता का परिणाम है। चलिए आपको बताते है कि आखिर इतने बड़े जल संकट का क्या कारण है? इसे कैसे बचाया जा सकता है। और भारत में जल संकट की क्या है ताजा स्थिति।

बेंगलुरु में जल संकट की कमी के पीछे का कारण क्या है ?

कम वर्षा और खाली जल भंडार- पिछले कुछ मानसूनों में शहर में कम बारिश देखी गई है। इससे शहर के लिए पानी के प्राथमिक स्रोत कावेरी नदी पर काफी प्रभाव पड़ा है। नदी के निचले स्तर का मतलब पीने और कृषि के लिए कम पानी है।

जलवायु परिवर्तन – इसका दूसरा सबसे बड़ा कारण है जलवायु प्रदूषण वहीं जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा और लंबे समय तक सूखे सहित बदलते मौसम के पैटर्न ने बेंगलुरु के जलाशयों और प्राकृतिक जल निकायों में पानी की उपलब्धता कम कर दी है।

जल निकायों का प्रदूषण – औद्योगिक निर्वहन, अनुपचारित सीवेज और ठोस अपशिष्ट डंपिंग से प्रदूषण ने जल स्रोतों को दूषित कर दिया है, जिससे वे उपभोग के लायक नहीं रह गए हैं और उपलब्ध जल आपूर्ति में और कमी आई है।

अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा – जल आपूर्ति प्रणालियों और सीवेज नेटवर्क सहित शहर का बुनियादी ढांचा, इसके तीव्र विकास के साथ तालमेल नहीं बिठा पाया है। जिसके कारण लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में पानी की कमी के पीछे का कारण क्या हैं?

वर्षा का असमान वितरण: भारत में वर्षा का असमान वितरण होता है, जिसमें अधिकांश वर्षा मानसून के मौसम (जून से सितंबर) के दौरान होती है। केरल और मेघालय जैसे राज्यों में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि राजस्थान और गुजरात जैसे शुष्क क्षेत्रों में पानी की लगातार कमी रहती है। 1 सितंबर, 2023 तक संचयी वर्षा दीर्घकालिक औसत से 11% कम थी।

केंद्रीय भूजल बोर्ड ने जून 2022 में बताया कि पंजाब का पहले 100 मीटर का भूजल 2029 तक ख़त्म हो जाएगा। वहीं 2039 तक 300 मीटर की पहुंच में भूजल समाप्त हो जाएगा।

जनसंख्या वृद्धि: लगभग 1.4 अरब लोगों के साथ भारत की जनसंख्या वर्ल्ड में सबसे अधिक है। 2050 तक जनसंख्या बढ़कर 1.7 बिलियन होने की उम्मीद है। इससे देश में उपलब्ध सीमित जल संसाधनों पर भारी मांग बढ़ जाएगी।

भारत में जल की कमी का क्या प्रभाव हो सकता है?

स्वास्थ्य समस्याएं: सुरक्षित पेयजल तक पहुंच की कमी से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं जैसे निर्जलीकरण, संक्रमण, बीमारियां और यहां तक ​​कि मृत्यु भी हो सकती है।

विश्व बैंक के अनुसार, भारत में दुनिया की 18% आबादी रहती है, लेकिन इसके पास केवल 4% लोगों के लिए पर्याप्त जल संसाधन हैं। 2023 में, लगभग 91 मिलियन भारतीयों को सुरक्षित पानी तक पहुंच नहीं मिलेगी।

कृषि उत्पादकता में कमी- पानी की कमी का कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जो देश के 85% जल संसाधनों का उपभोग करता है। पानी की कमी से फसल की पैदावार कम हो सकती है, खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और किसानों में गरीबी बढ़ सकती है।

सरकार जल संकट को दूर करने के लिए क्या कर रही है?

जल शक्ति अभियान (जेएसए) – इसे 2019 में 256 जल-तनाव वाले जिलों में जल संरक्षण, पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए एक आंदोलन के रूप में शुरू किया गया था।

अटल भुजल योजना- कार्यक्रम भूजल संसाधनों के पुनर्भरण और भूजल संसाधनों के बेहतर दोहन पर जोर देता है।

जल संकट को दूर करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय

●अत्यधिक खपत को कम करना: पानी की कमी का एक मुख्य कारण कृषि, उद्योग और घरों जैसे विभिन्न क्षेत्रों द्वारा पानी का अत्यधिक और अकुशल उपयोग है।

●जल दक्षता में सुधार: पानी की कमी को दूर करने का एक अन्य तरीका जल प्रणालियों और बुनियादी ढांचे, जैसे वितरण नेटवर्क, उपचार संयंत्र और भंडारण सुविधाओं के प्रदर्शन में सुधार करना है।

पानी के वैकल्पिक या अतिरिक्त स्रोतों का पता लगाएं, जैसे वर्षा जल संचयन, जलसेतु, अलवणीकरण, पानी का दुबारा उपयोग और भूजल निष्कर्षण।

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