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BMC Mayor Row: बीजेपी के साथ सौदेबाजी या पार्षदों की ट्रेनिंग? शिवसेना के विजयी उम्मीदवारों संग क्या रणनीति बना रहे शिंदे? खुल गई पोल?

BMC Mayor Row

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

BMC Mayor Row: बीएमसी की गद्दी पर बैठने वाला शख्स महायुती से होगा। ये सभी को पता है। हालांकि, वो कौन होगा इसको लेकर मंथन का दौर जारी है। बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट ने बीएमसी की 118 वार्डों में जीत दर्ज कर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इस बीच मेयर चयन को लेकर जद्दोजहद चल रही है।

इधर एकनाथ शिंदे अपने विजयी पार्षदों के साथ बांद्रा के होटल ताज लैंड्स में मीटिंग कर चुके हैं। इसको लेकर पूछा जा रहा है कि क्या शिंदे बीजेपी के साथ सौदेबाजी कर रहे हैं या पार्षदों की ट्रेनिंग जारी है? तमाम सवालों के बीच सियासी टिप्पणीकारों के हवाले से कुछ अपुष्ट खबरें आ रही हैं जो बीएमसी के नए मेयर चयन के बीच जारी मंथन को नई हवा दे रही हैं।

शिवसेना के विजयी उम्मीदवारों संग क्या रणनीति बना रहे शिंदे?

इसका पुख्ता रूप से जवाब एकनाथ शिंदे ही दे सकते हैं। रविवार को वे बांद्रा के होटल ताज लैंड्स में शिवसेना पार्षदों से मिले। इसके बाद एकनाथ शिंदे ने कहा कि उन्हें विजयी उम्मीदवारों को गाइड करना है। उनकी पार्टी बालासाहेब के विचारों को आगे बढ़ा रही है। ऐसा एकनाथ शिंदे का कहना है। हालांकि, सियासी टिप्पणीकार शिंदे की इस कुटनीति को बीजेपी पर दबाव बनाने की ट्रिक बता रहे हैं।

दरअसल, बीएमसी की 29 वार्डों में शिवसेना की जीत हुई है और 89 पर बीजेपी जीती है। इन दोनों को मिलाकर 118 सीट हुए जो मेयर बनाने के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, शिंदे गुट भी बीएमसी मेयर पद के लिए दावेदारी ठोंक रहा है जिसको लेकर महाराष्ट्र का सियासी पारा हाई है। विजयी पार्षदों को बुधवार तक होटल में ठहरने के निर्देश हैं जिसको लेकर हो-हल्ला भी मचा है।

बीएमसी मेयर चयन को लेकर सियासी उठा-पटक

दशकों बाद ठाकरे परिवार की बादशाहत बीएमसी से कम हुई है। बीजेपी पहली बार बीएमसी में अपना मेयर बनाने की स्थिति में है। हालांकि, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना भी दावेदारी पेश करती नजर आ रही है। शिवसेना भले ही 29 सीटों पर चुनाव जीत सकी है, लेकिन बाला साहेब के सच्चे उत्तारिधारी के रूप में खुद को पेश करते हुए शिंदे बीएमसी पर दबदबा चाहते हैं।

टिप्पणीकारों की मानें तो शिंदे गुट बीएमसी में नए मेयर चयन पर मंथन कर रहा है। यहां भी पावर शेयरिंग की संभावना जताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि बीएमसी में ढ़ाई-ढ़ाई साल का फॉर्मूला लागू हो सकता है। हालांकि, इसको लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बीएमसी का नया मेयर कौन और किस दल से चुना जाता है? साथ ही मेयर चयन को लेकर जारी मंथन पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं।

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