Chandra Grahan 2026: पूर्वी और मध्य एशिया के अधिकांश देशों में ग्रहण का साया नजर आने वाला है। 4 मार्च को मनाए जाने वाले होली पर्व से ठीक पहले 3 तारीख को चंद्र ग्रहण लगेगा। इस दौरान सूतक काल की शुरुआत 3 मार्च की सुबह 06:20 से होगी। सूतक काल के दौरान कई काम वर्जित होते हैं। जैसे भोजन करना, पूजा-पाठ करना, कैंची या सुई चलाना व अन्य कई काम हैं।
इस दौरान लोग चाहें तो पूजा स्थल से किनारे बैठ कर ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं। मान्यता है कि इन मंत्रों का जाप करने से लोगों की परेशानियां दूर होती हैं। देश में होली से पहले लगने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर और भी कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं जिसके बारे में हम आपको बताएंगे।
चंद्र ग्रहण पर सूतक काल के दौरान करें इन मंत्रों का जाप!
दुनिया के विभिन्न देशों में 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का साया नजर आएगा। इस दिन ग्रहण से पहले सुबह 6:20 से सूतक काल की शुरुआत होगी। ऐसे में लोग मंदिरों के कपाट खोले बगैर और मूर्तियों को बिना स्पर्श किए कुछ मंत्रों का जाप कर सकते हैं। घर में किनारे साफ-सुथरे स्थान पर एक आसनी लगाकर मंत्रों का जाप करने से लाभ मिल सकता है।
सूतक काल के दौरान विशेष तौर पर लोगों को महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र, शिव मंत्र, चंद्र मंत्र, हनुमान चालीसा और महामंत्र जपने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इन मंत्रों का जप करना अत्यंत लाभदायक और फलदायी साबित हो सकता है। यही वजह है कि घर के बड़े-बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं आदि को ऐसा करने की सलाह दी जाती है।
भारत समेत दुनिया के कई देशों में नजर आएगा Chandra Grahan 2026
3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत समेत दुनिया के कई देशों में नजर आएगा। इसमें प्रमुख रूप से पूर्वी एशिया में स्थित जापान, चीन, कोरिया जैसे देश शामिल हैं। इससे इतर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के साथ उत्तर और दक्षिण अमेरिका में भी चंद्र ग्रहण की दृश्यता स्पष्ट होगी। भारत की बात करें तो यहां ग्रहण पहर की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे से होगी। पूर्णता ग्रहण शाम 4:34 से प्रारंभ होगा। पूर्णता की समाप्ति शाम 5:33 बजे होगी। वहीं ग्रहण की समाप्ति शाम 6:48 बजे होनी है।
सनद रहे कि ग्रहण काल के दौरान भोजन, सुई, कैंची, चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग, नए या शुभ कार्य का आरंभ, नींद, यात्रा आदि से बचें। ऐसा करना लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। ग्रहण पूरा होने के पश्चात स्नान-ध्यान कर मंदिरों में गंगा जल छिड़कें और मूर्तियों का शुद्धिकरण करें। अपनी क्षमता अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। तत्पश्चात ताजा भोजन बनाकर ग्रहण करें।
Disclaimer: यहां साझा की गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है। डीएनपी इंडिया/लेखक इन बातों की सत्यता का प्रमाण नहीं प्रस्तुत करता है।
