‘हमारे पास कोर्ट मौजूद है दखलअंदाज़ी ना दें…’ क्या CJP Protest को हवा दे रहा था UN, क्यों भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

CJP protest: विरोध प्रदर्शन को लेकर यूएन को टिप्पणी करना भारी पड़ा क्योंकि भारत ने जिस तरह से इसका जवाब दिया वह मुंह बंद करने के लिए काफी है। आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स जो फिलहाल सुर्खियों में है।

CJP Protest

Photo Credit- Google CJP Protest

CJP protest: दिल्ली में बीते कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के द्वारा ऐलान किए गए जंतर मंतर प्रदर्शन को लेकर पुलिस सख्त दिखी। जगह-जगह पर प्रदर्शन को रोकने और बड़े-बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया गया जिसे लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा गर्म है। इस सबके बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी जिसे लेकर भारत ने अपना सख्त रुख दिखाया है। यूएन द्वारा की गई टिप्पणी को अनुचित बताते हुए इसे आंतरिक मामला कहा है। हस्तक्षेप न करने की अपील की है। जेनेवा की तरफ से कहा गया था कि भारतीय संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है। जानिए क्या है पूरा मामला।

यूएन को भारत ने क्या दिया जवाब

यूएन की टिप्पणी को देखकर भारत की तरफ से इसका जवाब दिया गया जहां कहा गया था कि “हमने नई दिल्ली में आज की घटनाओं के बारे में OHCHR की बातें देखी हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांति से इकट्ठा होने का अधिकार हमारे संविधान द्वारा गारंटीकृत है और मज़बूत संस्थानों, एक स्वतंत्र न्यायपालिका और एक स्वतंत्र मीडिया द्वारा सुरक्षित है। हर लोकतंत्र की तरह, भारतीय नागरिक सार्वजनिक व्यवस्था के हित में उचित पाबंदियों के अधीन इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं।”

भारत ने CJP Protest को बताया आंतरिक मामला

भारत ने आगे कहा कि “अधिकारी, अपनी ओर से, कानून के अनुसार काम करते हैं, और हमारी अदालतें किसी भी शिकायत के समाधान के लिए सभी के लिए उपलब्ध रहती हैं। इसलिए OHCHR की चिंताएं गलत हैं और भारत के आंतरिक मामलों में एक अनुचित दखल है। इस संदर्भ में, OHCHR को निष्पक्षता और गैर-चुनिंदापन के अपने जनादेश के अनुरूप, अन्य जगहों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए।”

UN की किस टिप्पणी पर भारत ने दिया सख्त जवाब

दरअसल 10 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर प्रदर्शन की घोषणा की गई थी जिसे दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दी गई। ऐसे में कई प्रदर्शनकारी, नेताओं, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था। इस सबके बीच OHCHR संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने ने सबके सामने चिंता जताई। शांति से इकट्ठा होने का सम्मान करने, संयम बरतने और पकड़े गए लोगों को छोड़ने की अपील की। जहां स्पष्ट तौर पर यूएन की तरफ से यह कहा गया था कि भारत में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार लोगों को है।

 

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