‘राजधानी को किले में बदल…’ अभिजित दिपके, आशुतोष रांका सहित सौरव दास के साथ पुलिस ने किया खेला, बिफरे Shashi Tharoor ने हिरासत पर दागे सवाल

Shashi Tharoor: अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को जंतर मंतर प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया।वहीं इस सबके बीच कांग्रेस नेता ने एक पोस्ट के जरिए दिल्ली पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला किया गया है।

Shashi Tharoor

Photo Credit- Google Shashi Tharoor

Shashi Tharoor: कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत का ऐलान भले ही कर दिया गया हो लेकिन दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा खेला किया। अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास समेत करीब 150 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रास्ते में ही फ्लाइट से लेकर बस में बैठाकर हिरासत में ले लिया। शायद इस चीज की उम्मीद भी नहीं की गई होगी कि जंतर मंतर पहुंचने से पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया जाएगा। वहीं इस सबके बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर में दिल्ली पुलिस की सुरक्षा के इंतजाम को देखते हुए कहा कि राजधानी को किले में तब्दील कर दिया गया है।

दिल्ली में सुरक्षा की स्थिति पर Shashi Tharoor ने उठाई आवाज

इसे लेकर x प्लेटफार्म पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखते हुए शशि थरूर ने कहा, “सुबह 2 बजे के बाद नेशनल कैपिटल लौटा और मैंने शायद ही कभी ऐसा कुछ देखा हो जैसा दिल्ली में अभी हो रहा है, हर कुछ सौ मीटर पर चेकपॉइंट, हमारी सड़कों पर कंक्रीट के बैरियर और स्पाइक स्ट्रिप्स बिछाए गए हैं, पूरे शहर में 22,000 पुलिस और पैरामिलिट्री की युद्ध जैसी तैनाती है, 250 ट्रेनें कैंसिल हैं और 45 मेट्रो स्टेशन बंद हैं, और दिल्ली और उसके आसपास के युवाओं को उनके अपने घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं — यह सब नागरिकों को हमारे चुनावों की ईमानदारी पर शांति से सवाल उठाने से रोकने के लिए है। सबसे ज़्यादा पीछे ले जाने वाला (और दबाने वाला) नेशनल कैपिटल के बीचों-बीच इंटरनेट बंद करना है।”

महिलाओं की सुरक्षा पर दागे कांग्रेस नेता ने सवाल

कांग्रेस नेता ने आगे सवाल उठाया कि “आने-जाने की आज़ादी पूरी तरह से बंद है। जंतर-मंतर को ठीक इसलिए बनाया गया था ताकि नागरिक दिल्ली के बीच में अपनी असहमति जता सकें, और आज वहां जाने वाली सड़कों को भी आउट ऑफ बाउंड्स घोषित कर दिया गया है। यह पूछने का हक है कि जब हमारी कैपिटल में महिलाओं को सुरक्षा की ज़रूरत होती है तो यह ज़बरदस्त मैनपावर और अर्जेंसी कहां गायब हो जाती है।”

हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की शशि थरूर ने की मांग

सुरक्षा के इंतजाम को देखते हुए शशि थरूर ने कहा कि “हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करना होगा। और अगर प्रदर्शनकारी सोमवार को वापस आ जाते हैं, तो क्या अधिकारी फिर से राष्ट्रीय राजधानी को बंद कर देंगे? हमारी GenZ, एक अघोषित Emer-GenZ से बेहतर की हकदार है। सरकार जिसे अपने चुनावों की निष्पक्षता पर भरोसा है, वह उनके बारे में सवालों का स्वागत करेगी, जबकि जो सरकार उनसे बचने के लिए अपनी राजधानी को किले में बदल देती है, वह उन्हीं शक को और गहरा करती है जिन्हें वह दबाना चाहती है। सरकार को जवाब देना चाहिए, लाठियां नहीं; अभिव्यक्ति, दमन नहीं।”

बैरिकेट्स चुनाव आयोग में विश्वास को कर रहा खत्म

इसके अलावा आगे कहा कि ” बैरिकेट्स चुनाव आयोग में विश्वास बहाल करने के लिए कुछ नहीं करेंगे, और जितनी जल्दी वह जनता के सवालों का जवाब देगा, उतनी ही जल्दी शांति बहाल होगी। एक लोकतंत्र की ताकत इस बात से मापी जाती है कि वह अपने काम पर सवाल उठाने वालों के साथ कैसा व्यवहार करता है, और उस पैमाने से, आज हमने जो देखा है वह पूरी तरह से शर्मनाक और अमानवीय है।”

गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने जंतर मंतर पर बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया था लेकिन इस सब के बीच सौरव दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने अलग-अलग जगह पर रखा है। रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि दीपके को गुरुग्राम लाया गया तो वही आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस की तरफ से कड़े इंतजाम किए गए हैं।

 

 

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