Delhi pollution: जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है और दिवाली करीब है हवा की गुणवत्ता राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में खराब होती जा रही है। सांस लेने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंदी और जहरीली हवा की वजह से लोगों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। वहीं सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों की बात करें तो दिल्ली के कई सड़कों पर एक्यूआई 367 से 482 के बीच बताई जा रही है जो निश्चित तौर पर लोगों का जीना मुश्किल कर देने के लिए काफी है। सरकार की तरफ से दिल्ली पॉल्यूशन पर तमाम तरह के लगाम लगाए गए हैं लेकिन प्रदूषण पर फिर भी कंट्रोल नहीं हो रहा है।
तमाम पाबंदियां लेकिन प्रदूषण पर क्यों नहीं लगाम
दिल्ली पॉल्यूशन पर कंट्रोल करने के लिए सरकार की तरफ से गाड़ियों की आवाजाही और निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। दफ्तरों में सिर्फ 50% कर्मचारियों को काम करने का आदेश दिया गया है जबकि अन्य कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही पार्किंग की फीस बढ़ा दी गई है ताकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर लोगों का रुझान भर सके। इससे प्रदूषण का स्तर दिन प्रतिदिन गहराता जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या अभी और परेशानी बाकी है।
आखिर क्यों Delhi Pollution पर खतरा नहीं हो पा रहा कंट्रोल
वहीं इस सबके बीच अगर विशेषज्ञ की माने तो हवा का स्तर खराब होने और दिल्ली पॉल्यूशन बढ़ने की वजह मौसम का बदलना, हवा की रफ्तार कम और नमी का बढ़ना बताया जा रहा है। इसके अलावा गाड़ियों का धुआं, फैक्ट्री का कचरा, निर्माण कार्य भी मुख्य वजह बताई जा रही है। पराली जलाना वजह बन रही है। इसकी वजह से लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और दिल से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सरकार द्वारा उठाए गए कदम प्रभावी नहीं हैं। हर साल दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में असली वजहों को ढूंढकर उन्हें जड़ से खत्म करना होगा तभी लोगों को इस मुश्किलों से छुटकारा मिल सकता है।
