अभ्यास से प्रगति तक: ‘डार्सल’ के जरिए डिजिटल शिक्षण को अपना रहे MCD के बच्चे

MCD: कार्यक्रम लागू होने के मात्र 60 दिनों के भीतर भरथल बॉयज के छात्र मयंक ने हल किए 30,000 से अधिक प्रश्न; नजफगढ़ जोन में बच्चों के बीच नियमित अभ्यास की संस्कृति को मिली नई दिशा।

MCD

Photo Credit- Google MCD

MCD: सुलभ तकनीक किस प्रकार बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को सशक्त बना सकती है, इसका एक प्रेरक उदाहरण दिल्ली के नगर निगम (MCD) प्राथमिक विद्यालय, भरथल बॉयज में देखने को मिला है। यहाँ के कक्षा 5 के छात्र मयंक ने ‘डार्सल’ (Darsel) व्हाट्सएप-आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म के उपयोग करके कार्यक्रम लागू होने के मात्र 60 दिनों के भीतर 30,000 से अधिक गणितीय प्रश्नों को हल किया है। मयंक की यह उपलब्धि न केवल उसकी लगन को दर्शाती है, बल्कि दिल्ली के नगर निगम स्कूलों में बच्चों द्वारा स्व-प्रेरित (self-directed) अभ्यास की बढ़ती क्षमता को भी उजागर करती है।‘डार्सल’ संस्था द्वारा दिल्ली नगर निगम (MCD) के शिक्षा विभाग के सहयोग से प्रदान किया जा रहा यह एक सफल अभ्यास प्लेटफॉर्म है। अपने पायलट चरण के दौरान नजफगढ़ जोन के लगभग 12,000 छात्रों तक इसे पहुँचाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य व्हाट्सएप जैसे परिचित और आसान माध्यम का उपयोग करके गणित के अभ्यास को बच्चों के लिए अधिक सुलभ, आकर्षक और निरंतर बनाना है।

जोनल नेतृत्व और नियमित निगरानी की अहम भूमिका

नजफगढ़ जोन में इस कार्यक्रम की सफलता के पीछे जोनल नेतृत्व की निरंतर सक्रियता और रणनीतिक निगरानी मुख्य आधार रही है। श्रीमती मीरा (क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशक – Zonal DDE) के कुशल मार्गदर्शन और श्रीमती इंदु देसवाल (क्षेत्रीय अकादमिक समन्वयक – Zonal Academic Coordinator) द्वारा की जा रही नियमित समीक्षा, डेटा मॉनिटरिंग और लगातार मार्गदर्शन के कारण ही यह संभव हो पाया है।

जोनल स्तर पर नियमित डेटा ट्रैकिंग और स्कूलों के साथ निरंतर संवाद ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को उत्साहित रखा है, जिससे जमीनी स्तर पर बच्चों का जुड़ाव और अभ्यास का स्तर तेजी से बढ़ा है।

केवल संख्याएँ नहीं: सीखने की आदत और अभिभावकों का सहयोग

मयंक की यह सफलता केवल हल किए गए प्रश्नों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे छोटे और निरंतर प्रयास के साथ सीखने की एक मजबूत आदत बनाई जा सकती है। डार्सल के माध्यम से छात्र गणित की अवधारणाओं का अभ्यास करते हैं, तुरंत उत्तर पाते हैं और अपनी गति से सीखना जारी रखते हैं।इस पूरी प्रक्रिया में भरथल बॉयज स्कूल के प्रधानाचार्य श्री अखिलेश जी का मार्गदर्शन, उनकी वर्ग-शिक्षिका श्रीमती ममता अरोड़ा जी की प्रेरणा और अभिभावकों का निरंतर सहयोग बेहद निर्णायक रहा है। चूँकि यह कार्यक्रम घर पर माता-पिता के फोन के माध्यम से संचालित होता है, इसलिए अभिभावकों का सहयोग बच्चों को घर पर नियमित अभ्यास का समय उपलब्ध कराने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ है

भरथल बॉयज की शिक्षिका श्रीमती ममता अरोड़ा जी बताती हैं:“मयंक की इस लगन ने पूरी कक्षा को प्रेरित किया है। जब अभिभावक घर पर बच्चों को फोन और थोड़ा समय उपलब्ध कराते हैं, तो कक्षा में पढ़ाया गया पाठ बच्चे बहुत आसानी से समझ लेते हैं। मात्र दो महीनों में बच्चों के मन से गणित का डर पूरी तरह खत्म हो गया है।” भरथल बॉयज के प्रधानाचार्य श्री अखिलेश जी ने कहा:“तकनीक, जोनल अधिकारियों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के जुड़ाव ने हमारे स्कूल में सीखने का माहौल बदल दिया है। जब नेतृत्व, शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों को प्रेरित करते हैं, तो ऐसे ही परिणाम देखने को मिलते हैं।”

बेटियाँ भी पीछे नहीं: पोचनपुर गर्ल्स की छात्राओं ने रचा इतिहास

इसी क्रम में MCD प्राथमिक विद्यालय, पोचनपुर गर्ल्स की छात्राओं ने भी मात्र 60 दिनों के भीतर शानदार प्रदर्शन करते हुए इस कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है:नीतू पटनायक ने 10,626 प्रश्न हल करके एक मिसाल कायम की है।

मनदीप कौर ने 10,378 प्रश्न हल कर अपनी बेहतरीन लगन का परिचय दिया है। पोचनपुर गर्ल्स स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती सविता रोहिल्ला जी और शिक्षिका सुश्री नेहा यादव जी के निरंतर मार्गदर्शन और प्रयासों से स्कूल की अन्य छात्राएं भी रोजाना उत्साहपूर्वक अभ्यास कर रही हैं। पोचनपुर गर्ल्स की शिक्षिका सुश्री नेहा यादव जी का कहना है:“नीतू और मनदीप जैसी छात्राओं की लगन यह साबित करती है कि जब लड़कियों को सही माध्यम और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे कमाल कर सकती हैं। डार्सल के माध्यम से वे खेल-खेल में गणित सीख रही हैं।”पोचनपुर गर्ल्स की प्रधानाचार्या श्रीमती सविता रोहिल्ला जी ने साझा किया:“60 दिनों के भीतर 10,000 से अधिक प्रश्न हल करना हमारी छात्राओं के आत्मविश्वास और उत्सुकता को दर्शाता है। जोनल टीम की नियमित मॉनिटरिंग और सहयोग ने हमारे स्कूल में अभ्यास के प्रति एक नया उत्साह भर दिया है।”

शिक्षकों को सहयोग, छात्रों का सशक्तिकरण

शिक्षक पहले से ही कई अकादमिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालते हैं; ऐसे में डार्सल कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि यह शिक्षकों के काम का बोझ बढ़ाने के बजाय कक्षा के शिक्षण में उनका सहयोग करे।छात्र व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से स्वतंत्र रूप से अभ्यास करते हैं, जबकि शिक्षक और स्कूल नेतृत्व प्रदर्शन रिपोर्ट (Performance Reports) का उपयोग करके बच्चों की भागीदारी को समझ सकते हैं और उन विषयों की पहचान कर सकते हैं जहाँ अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है। इससे कक्षा का समय पढ़ाने, चर्चा करने और व्यक्तिगत मार्गदर्शन पर केंद्रित रहता है।बेहतर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) से जुड़ावयह पहल बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) को मजबूत करने, शैक्षिक संसाधनों तक पहुँच सुधारने और शिक्षा में तकनीक के सार्थक उपयोग पर जोर देती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) बुनियादी गणितीय कौशल पर विशेष जोर देती है, और इस प्रकार के नियमित अभ्यास वाले कार्यक्रम बच्चों के मूलभूत गणितीय कौशल को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

एक आशाजनक शुरुआत

60 दिनों के भीतर मयंक के 30,000 से अधिक प्रश्न, नीतू पटनायक के 10,626 प्रश्न और मनदीप कौर के 10,378 प्रश्न इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं कि जब बच्चों को सरल, सुलभ और आकर्षक शिक्षण साधन मिलते हैं और नेतृत्व द्वारा नियमित मॉनिटरिंग की जाती है, तो निरंतर अभ्यास से क्या परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।जैसे-जैसे नजफगढ़ जोन में यह पायलट प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहा है, मुख्य ध्यान अधिक से अधिक बच्चों को अभ्यास करने, अपनी गलतियों से सीखने और गणित में आत्मविश्वास निर्माण करने के लिए प्रेरित करने पर है—एक समय में एक प्रश्न।

Exit mobile version