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NCERT Book Row: नहीं बख्शेंगे! किताब विवाद पर SC का तल्ख रुख, सरकार को लगाई तगड़ी फटकार; क्या आगे भी बढ़ेंगी मुश्किलें?

NCERT Book Row

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

NCERT Book Row: दिल्ली से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई चर्चा बटोर रही है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में आज चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एनसीआरटीई किताब विवाद को लेकर सरकार को तगड़ी फटकार लगाई है। कक्षा 8वीं की किताब में न्यायपालिका पर लिए गए चैप्टर का उल्लेख किया है।

जस्टिस सूर्यकांत ने साफ तौर पर कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह न्यायपालिका के खिलाफ गहरी साजिश है जिसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने नए चैप्टर को न्यायपालिका की गरिमा कम करने की चाल बताते हुए तल्ख रुख अपनाया है।

किताब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का तल्ख रुख!

कक्षा 8वीं की एनसीआरटीई की एक किताब में न्यायपालिका के भ्रष्टाचार पर एक चैप्टर ने नया संग्राम खड़ा कर दिया। आलम ये है कि सुप्रीम कोर्ट तक इस मसले को लेकर तल्ख हो गया। एनसीआरटीई किताब विवाद को लेकर आज कोर्ट में सुनवाई भी हुई। इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने तल्ख रुख के साथ केन्द्र को फटकार लगाई है।

बार एंड बेंच के एक्स हैंडल से सुनवाई से जुड़े डिटेल साझा किए गए हैं। इसके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने की बेंच ने न्यायिक भ्रष्टाचार पर अध्याय वाली एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे गहरी साजिश बताया है। साथ ही एनसीईआरटी निदेशक को नोटिस भी जारी किया है।

कोर्ट की बेंच ने निर्देश जारी कर कहा है कि इस किताब से जुड़ी सभी कॉपियां (डिजीटल व लिखित) लोगों की पहुंच से दूर होनी चाहिए। साथ ही जिसने यह चैप्टर लिखा है उसकी डिटेल सुप्रीम कोर्ट से साझा की जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता को फटकारते हुए कहा कि न्यायपालिका आज खून से लथपथ है। यह एक सोची-समझी चाल और गहरी साजिश है।

8वीं की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले हिस्से पर विवाद!

दरअसल, एनसीआरटीई की कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में नया चैप्टर ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ जोड़ा गया। इसको लेकर खूब विवाद देखने को मिला। न्यायपालिका से जुड़े लोग सुप्रीम कोर्ट तक मामले को ले गए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए फटकार लगाई। आज इसी से जुड़े प्रकरण को लेकर सुनवाई हुई है।

चीफ जस्टिस ने इसे सोची-समझी साजिश बताते हुए पूछा है कि बच्चों और अभिवावकों के बीच इस चैप्टर का क्या संदेश जाएगा। वे किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दे सकते। एनसीआरटीई किताब विवाद पर आगे भी सुनवाई हो सकती है। ऐसे में उम्मीद है कि एनसीआरटीई जैसी सरकारी संस्थान की मुश्किलें आगे भी बढ़ें।

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