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Diwali 2024: दिवाली पर पति-पत्नी को एक साथ क्यों करनी चाहिए मां लक्ष्मी की पूजा? जानें शास्त्रीय मत

Diwali 2024: सनातन परंपरा में जन्म लेने वालों के लिए दिवाली पर्व का खास महत्व है। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला ये खास पर्व वर्ष 2024 में 31 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

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By: Gaurav Dixit

Published: अक्टूबर 28, 2024 2:36 अपराह्न

Diwali 2024
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Diwali 2024: सनातन परंपरा में जन्म लेने वालों के लिए दिवाली पर्व का खास महत्व है। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला ये खास पर्व वर्ष 2024 में 31 अक्टूबर को मनाया जाना है। दिवाली (Diwali 2024) के दिन मां लक्ष्मी की पूजा होती है और भक्त देवी से आशीर्वाद मांगते हैं। दिवाली में मां लक्ष्मी की पूजन-पाठ के दौरान कई सारे विधि-विधान का पालन करना भी अनिवार्य होता है।

दिवाली के दिन मां लक्ष्मी (Diwali Devi Lakshmi Puja) की पूजा कैसे करनी चाहिए इसको लेकर भी कई तरह के सवाल लोगों के मन में होते हैं। जैसे कि क्या दिवाली पर पति-पत्नी को एक साथ मां लक्ष्मी की अराधना करनी चाहिए? पति-पत्नी दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा (Lakshmi Puja) कैसे करें कि कृपा बरसे? ऐसे में आइए हम आपको इस तरह के तमाम सवालों के जवाब देते हैं।

Diwali 2024- दिवाली पर पति-पत्नी कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा?

दिवाली (Diwali 2024) के दिन हर शख्स मां लक्ष्मी की अराधना करता है। सभी लोग देवी को प्रणाम कर आशीर्वाद मांगते हैं। हालाकि पति-पत्नी द्वारा माता की अराधना एक-साथ बैठकर करने का खास महत्व है। दरअसल सनानत संस्कृति में पति-पत्नी को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। मान्यता है कि पति के बिना पत्नी और पत्नी के बिना पति का जीवन अधूरा है। ऐसे में अगर दोनों के साथ मिलकर किसी धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बनें तो इसका अचूक लाभ मिलने की पूरी संभावना रहती है।

दिवाली के दिन की बात करें तो इस दिन भी पति-पत्नी को एक साथ बैठकर देवी लक्ष्मी की अराधना करनी चाहिए। पूजा के लिए पति-पत्नी एक साथ बैठें। इसके पश्चात माता लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा के निकट घी का दीपक जलाएं और ध्यान करें। ध्यान के पश्चात फूल, रोली, लाल बिंदी, चुनरी व श्रृंगार के अन्य सामान देवी को अर्पित करें। तत्पश्चात नैवेद्य का भोग लगाएं और ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:’ मंत्र का जप करें। इसके बाद देवी की आरती करें और प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद मांगे।

मान्यता है कि ऐसा करने से माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों को को मनचाहा आशीर्वाद देती हैं। इसके अलावा पति-पत्नी द्वारा एक साथ पूजा करने से आपसी तालमेल और परस्पर संबंध में भी इजाफा होता है जिसका लाभ आगामी समय में मिलता है।

पुरुष की शक्ति क्यों कहलाती है स्त्रियां?

स्त्रियों को पुरुष की शक्ति माना जाता है। कहते हैं, हर सफल व्यक्ति के जीवन में किसी महिला का योगदान अवश्य होता है। वो महिला मां, बहन, पत्नी या अन्य किसी रूप में आपका जीवन संवारने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करती है।

पौराणिक कथाओं में भी देखें तो देवताओं के नाम से पहले उनकी शक्ति (देवी) का नाम लिया जाता है। जैसे राधाकृष्ण, सीताराम आदि। इसीलिए सभी पुरुषों से कहा जाता है कि वे अपनी पत्नीयों से सम्मान भाव के साथ पेश आएं और जीवन के हर क्षण में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर बढ़ें।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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