El Nino: दुनिया में संघर्ष छिड़ा है जिसका असर तमाम देशों पर पड़ रहा है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों ने होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई बाधित की है। इससे इतर भी अन्य तमाम वस्तुओं का आयात प्रभावित हुआ है। इस कारण कई देशों में खाद्य संकट गहराता नजर आ रहा है। इसी बीच आईएमडी ने भारत में अल नीनो के उभरने की संभावना व्यक्त की है।
पूर्वानुमान के मुताबिक जून-जुलाई-अगस्त की अवधि में अल नीनो के उभरने की 62 फीसदी संभावना है। वहीं अगस्त-सितंबर-अक्टूबर में अल नीनो के 80 फीसदी बने रहने की संभावना है। इसको लेकर भारतीय कृषि जगत में हलचल तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पश्चिम एशिया युद्ध के बीच मौसम का रुख देश में समीकरण को और खराब करेगा? आइए इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं।
भारतीय कृषि जगत में El Nino के पूर्वानुमान से मची हलचल!
धान की बुआई का सत्र अभी शुरू नहीं हुआ है। खेतों में गेहूं की फसल पकने का इंतजार कर रहे किसानों के लिए मौसम विभाग का पूर्वानुमान आया है। इसको लेकर कृषि जगत में हलचल तेज है। दरअसल, आईएमडी ने जून-जुलाई-अगस्त माह में अल नीनो के उभरने की संभावना व्यक्त की है जो अक्टूबर तक बना रह सकता है। अल नीनो के सक्रिय होने का मतलब है कम बारिश और सूखे का संकट।
इसका सीधा प्रभाव कृषि जगत पर पड़ता है। यदि मौसम विभाग की पूर्वानुमान रिपोर्ट सही साबित हुई, तो फसलों की पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा। अल नीनो के उभरने और बने रहने की स्थिति में भारत सूखा के दौर से गुजर सकता है। ऐसे में धान और गन्ने की फसल बुरी तरह प्रभावित होगी। बारिश कम होने से मौसम का समीकरण भी बदलेगा जिससे कई पहलू प्रभावित होंगे। यही वजह है कि आईएमडी का पूर्वानुमान कृषि जगत में हलचल का कारण बना है।
पश्चिम एशिया युद्ध के बीच क्या और समीकरण खराब करेगा मौसम का रुख?
दुनिया के तमाम देश पश्चिम एशिया में छिड़ी प्रभुत्व की जंग का देश झेल रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। भारत में कच्चे तेल के साथ ऊर्चा के तमाम अन्य स्रोत का आयात प्रभावित हुआ है। इससे देश में हलचल देखने को मिली है। बाजार प्रभावित हैं। कॉमर्शियल गैस की कीमत बढ़ी है। इस संघर्ष ने देश में उच्च वस्तु कीमतों के कारण पहले दबाव उत्पन्न किया है।
मुद्रास्फीति की आशंका तेजी से गहरा रही है। ऐसे में यदि अल नीनो सक्रिय हुआ तो देश पर और बुरा असर पड़ सकता है। अल नीनो के कारण मौसम का बदला रुख फसलों के उत्पान को बुरी तरह प्रभावित करेगा। साथ ही कम वर्षा ग्रामीण आय को भी प्रभावित करेगी। यही वजह है कि आम जनजीवन पर इसका बुरा असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
