Mohan Yadav: किसानों को सशक्त करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार पूरी तत्परता से काम कर रही है। इसी क्रम में अन्नदाताओं के लिए आर्थिक अनुदान, कृषि यंत्र पर सब्सिडी, खाद्य-बीज आदि की उपलब्धता आदि सुनिश्चित कराई जा रही है। सीएम मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने एक और मुहिम को रफ्तार देते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का काम किया है।
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत सीएम मोहन यादव की सरकार इसे गति दे रही है। इसके तहत तीन हजार से अधिक कृषि सखी और किसानों को आर्थिक अनुदान मुहैया कराया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार के इस कदम से जहां एक ओर किसान सशक्त हो रहे हैं, वहीं लोगों तक केमिकल पदार्थों से मुक्त अनाज भी पहुंच रहा है।
MP में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही Mohan Yadav सरकार!
सीएम मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है।
🌱 प्राकृतिक खेती से समृद्धि की ओर…
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के माध्यम से सतत कृषि विकास को मिल रहा सशक्त आधार@DrMohanYadav51 @minmpkrishi #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh pic.twitter.com/N0d6j0AOT0
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) April 13, 2026
इसी क्रम में किसानों को जागरुक कर प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा रहा है। इसका असर ये है कि 1513 क्लस्टरों में 189125 किसान प्राकृतिक खेती का रुख कर चुके हैं। इन सभी किसानों को मोहन यादव सरकार हर वर्ष अनुदान देती है। वार्षिक अनुदान की रकम 4000 रुपए प्रति एकड़ है जो किसानों को सशक्त करने का काम कर रही है।
सरकार द्वारा कृषि मित्र भी चुने जा रहे हैं जिन्हें आर्थिक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के क्रम में सरकार अब तक 3026 कृषि सखी का चयन कर चुकी है। सभी कृषि सखी को 5000 रुपए प्रतिमाह की दर से मानदेय उपलब्ध कराया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार के ये कदम प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के क्रम में उठाए कदमों को दर्शाते हैं।
अन्नदाताओं को सशक्त करने की दिशा में उठाया कदम!
एमपी सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं को सशक्त करने की दिशा में ये कदम उठाया है। प्राकृतिक खेती आज के दिन में ज्यादा लाभकारी हो रही है। इसमें लागत कम और लाभ ज्यादा मिलने का दावा है। यही वजह है कि सीएम मोहन यादव की सरकार किसानों को प्रोत्साहित करते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का काम कर रही है। इसी क्रम में उन्हें आर्थिक अनुदान भी मुहैया कराया जा रहा है, ताकि वे सशक्त होकर कृषि जगत को नई ऊंचाई दे सकें।
