महिला उद्यमियों को संबल दे रही Mohan Yadav सरकार की स्टार्टअप नीति! इकोनॉमी को गति मिलने के साथ रोजगार के अवसरों का हुआ सृजन

सीएम Mohan Yadav के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार महिला उद्यमियों को संबल प्रदान करने का काम कर रही है। इससे सूबे की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के अवसरों का सृजन भी हो रहा है।

Mohan Yadav

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Mohan Yadav: आधी आबादी को सशक्त करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है। लाडली बहना योजना के माध्यम में महिलाओं तक आर्थिक मदद पहुंचाने की बात हो, या कुशल नीतियों से उनकी जिंदगी संवारने की हो। सूबे के सीएम मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार हर समय फ्रंटफुट पर नजर आती है। इसी कड़ी में एमएसएमई विकास नीति और स्टार्टअप नीति की चर्चा होती है। सीएम मोहन यादव की सरकार ने इन दोनों नीतियों के जरिए महिला उद्यमियों को संबल देने का काम किया है। इस कदम से जहां इकोनॉमी को गति मिल रही है, वहीं रोजगार के अवसरों का सृजन भी हुआ है।

आधी आबादी को संबल दे रही Mohan Yadav सरकार!

कुशल नीतियों की बदौलत मध्य प्रदेश सरकार आधी आबादी यानी नारी शक्ति को संबल देने का काम कर रही है।

इस कड़ी में सरकार की ओर से एमएसएमई विकास नीति 2025 और स्टार्टअप नीति 2025 लागू की गई। इसका सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। वर्तमान में देश में प्रत्येक छठा एमएसएमई महिला उद्यमियों के नाम है। 24.34 लाख में से 4.11 लाख इकाइयां महिलाओं द्वारा संचालित की जा रही हैं। स्टार्टअप्स में भी महिलाओं की भागीदारी नजर आ रही है। कुल 7264 में से 3476 स्टार्टअप महिलाओं द्वारा शुरू की गई हैं जो 48 फीसदी की भागीदारी सुनिश्चित करती हैं। ये दर्शाता है कि कैसे मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार महिला उद्यमियों को संबल देने का काम कर रही है।

इकोनॉमी को गति मिलने के साथ रोजगार के अवसरों का सृजन

सरकार की इस पहल से मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिली है। वित्तिय आदान-प्रदान ने इकोनॉमी को मजबूती देने का काम किया है। इसके साथ सूक्ष्म स्तर पर उद्योग को बढ़ावा देना स्वरोजगार के अवसरों का सृजन करता है। बड़ी तादाद में महिलाएं आज कढ़ाई, बुनाई समेत तमाम अन्य कार्यों में लिप्त हैं। इससे उनकी आजीविका आसानी से चल रही है और वे आत्मनिर्भर बनकर मध्य प्रदेश की विकास में योगदान दे रही हैं। मोहन यादव सरकार की कोशिश है कि आने वाले दिनों में एमएसएमई उद्योग को और बढ़ावा मिले और महिलाएं सशक्त हो सकें।

Exit mobile version