CM Mohan Yadav की पहल से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहे किसान! फसलों की सिंचाई आसान होने के साथ लाभदायक हुई खेती

CM Mohan Yadav के नेतृत्व वाली राज्य सरकार सूबे में किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही है। सौर ऊर्जा की मदद से संचालित हो रहे पंपों से फसलों की सिंचाई आसान हुई है और पैदावार बढ़ा है जो कृषकों को सशक्त कर रहा है।

CM Mohan Yadav

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

CM Mohan Yadav: मध्य प्रदेश में कृषि जगत की तस्वीर लगातार बदल रही है। किसानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इसका असर ये है कि एमपी के कृषक सशक्त होकर सूबे के विकास में मजबूती से योगदान दे पा रहे हैं। सीएम मोहन यादव की सरकार में इसमें अहम योगदान दे रही है। सरकार की ओर से कृषि से जुड़ी तमाम योजनाओं की किसानों तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना उनमें से एक है जो फसलों की सिंचाई आसान बना रही है। इससे कृषक आत्मनिर्भर होकर खेती से अधिक लाभ हासिल कर पा रहे हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहे MP के किसान!

मध्य प्रदेश के किसान ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहे हैं। राज्य सरकार की पहल का इसमें अहम योगदान है।

सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना की मदद से किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली मिल रही है। इससे लागत कम और लाभ ज्यादा हो रहा है। सौर ऊर्जा की मदद से कृषक अपनी फसलों की आवश्यकतानुसार सिंचाई कर पा रहे हैं। ये किसानों के आमदनी का नया स्रोत बन रही है। यही वजह है कि ऊर्जा क्षेत्र में किसान आत्मनिर्भर हो रहे हैं और फसलों की सिंचाई आसान हो रही है। सीएम मोहन यादव की सरकार की देख-रेख में अब तक योजना के अंतर्गत 27000 से अधिक सोलर पंप स्थापित हुए हैं। वहीं योजना (कुसुम सी) के अंतर्गत 2.5 लाख पंप इंस्टॉल हुए हैं। ये फसलों की सिंचाई आसान बना रहे हैं।

शासन की पहल से सशक्त हो रहे किसान!

राज्य के किसान शासन की पहल से सशक्त हो रहे हैं। कृषकों के फसल की सिंचाई की बात हो, या उन्हें समय पर उर्वरक, बीज, कृषि यंत्र व अन्य तमाम जरूरी वस्तुएं मुहैया कराने की। सीएम मोहन यादव की सरकार हर मोर्चे पर खड़ी नजर आती है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि कृषि विभाग राज्य के किसानों के हित से जुड़ी नीतियां बनाए। फसलों की सिंचाई के लिए बनी योजना, कृषि यंत्र पर सब्सिडी, फसलों का तय समय पर भुगतान आदि इसी प्रयास का हिस्सा है। इसका असर ये है कि कृषक सशक्त होकर राज्य के विकास की नींव और मजबूत कर रहे हैं।

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