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Manipur News: मणिपुर में CM के आने से पहले गुस्साई भीड़ ने फूंका मंच, इंटरनेट सेवा बाधित…धारा 144 लागू

मणिपुर में गुस्साई भीड़ का उग्र रूप देखने को मिला है। मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम से पहले ही भीड़ ने उनके मंच को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद जिले में धारा 144 और इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी गई हैं।

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By: DNP न्यूज़ डेस्क

Published: अप्रैल 28, 2023 4:11 अपराह्न

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Manipur News: मणिपुर में गुस्साई भीड़ का उग्र रूप देखने को मिला है। मुख्यमंत्री एक कार्यक्रम में आने वाले थे, उनके आने से पहले ही भीड़ ने उनके मंच को आग के हवाले कर दिया। मंच के नीचे रखी कुर्सियों को भी तोड़-फोड़ कर आग में झोंक दिया। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री का कार्यक्रम होगा की नहीं इस पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। पुलिस या प्रशासन ने इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी है।

मणिपुर के चुराचंदपुर में मुख्यमंत्री का प्रोग्राम था, जहां इस घटना को अंजाम दिया गया। मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह शुक्रवार को वहां एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे। यहां उन्हें एक जिम और खेल सुविधा केंद्र का उद्घाटन करना था। उनके पहुंचने से पहले ही भीड़ ने पहले तो उनका विरोध किया और उसके बाद उत्पात मचाते हुए कुर्सियां तोड़ीं। साथ ही जिम के भी कुछ सामान को आग के हवाले कर दिया। इस पर भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ तो उन्होंने मंच को ही आग के हवाले कर दिया।

धारा 144 लागू

गुरूवार को मणिपुर के चुराचांद पुर जिले के न्यू लमका में पीटी स्पोर्टस कॉम्प्लेक्स को गुस्साई भीड़ ने आग के हवाले कर दिया था। पुलिस ने तुरंत कार्यवाही करते हुए भीड़ को तितर बितर कर दिया। हालातों को देखते हुए शुरक्षा के एतबार से पूरे इलाके में इंटरनेट सेवा को बंद कर दी गई है। उस पूरे इलाके में धारा 144 भी लगा दी गई है।

क्यों हो रहा है विरोध

बताया जा रहा है कि भीड़ का नेतृत्व स्वदेशी जनजातीय नेताओं के मंच की ओर से किया जा रहा था। यह समूह बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार के एक फैसले का विरोध कर रहा है। जिस फैसले में आदिवासियों के लिए आरक्षित और संरक्षित वन क्षेत्रों का सर्वे कराया जाना है। जनजातीय मंच राज्य सरकार पर चर्च गिराए जाने का आरोप लगा रहा है। संगठन से सबंधित लोगों ने जिले में बंद का एलान किया है। इस संगठन को वहां के छात्र  संगठनों का भी साथ मिल रहा है।

अदालत ने क्या कहा

मणिपुर सरकार ने पूर्वी इंम्फाल में तीन चर्चों को यह कहकर ढहा दिया कि उन्हें अवैध रूप से बनाया गया था। उन चर्चों में इवेंजेलिकल बैपटिस्ट कन्वेंशन चर्च, इवेंजेलिकल लूथरन चर्च और कैथोलिक जैसे चर्च शामिल थे। इस आदेश के खिलाफ मणिपुर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी जिस पर उच्च न्यायलय ने रोक लगाने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि चर्च अदालत को बताने में असफल रहे कि उन्होंने निर्माण के लिए क़ानूनी मंजूरी ली थी।

साल 2001 में ट्राइब्लस स्टूडेंट यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने भी मौजूदा सरकार को पत्र देकर कहा था कि इम्फाल में आदिवासी कलोनी में बने 8 चर्चों को खाली कराने का आदेश वापस ले लिया जाये। तीन साल पहले 24 दिसंबर 2020 को सुरचंद्र सिंह ने एक नोटिस जारी कर आरोप लगाया था कि 13 स्थानों पर चर्च और गैराज बनाकर सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें: Karnataka Election 2023: मछुआरों के लिए कांग्रेस के बड़े ऐलान, राहुल बोले- बीमा कवर और डीजल पर मिलेगी सब्सिडी

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