Nepal Tibet Flood: सामने पानी का सैलाब, कैसे एक शिक्षक ने बचाई 1643 बच्चों की जान, जानकर चौक जाएंगे आप

नेपाल के एक स्कूल के प्राचार्य ने तेज पानी का सैलाब आने से कुछ मिनट पहले अदम्य साहस का परिचय देते हुए 1643 बच्चों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की है।

Nepal Tibet Flood

Nepal Tibet Flood - Rajendra Dawadi (Image/Google)

Nepal Tibet Flood: 26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल बाढ़ में 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2500 से ज्यादा लोग लापता हैं। लेकिन इन सबके बीच नेपाल के एक विद्यालय के प्राचार्य को लेकर चर्चा देश और दुनिया में तूल पकड़ता जा रहा है। अदम्य साहस का परिचय देते हुए विद्यालय के प्राचार्य ने बाढ़ आने से चंद मिनटे पहले जानकारी मिलते ही 1643 बच्चों को सुरक्षित जगह पर पहुँचाकर मानवता को चरितार्थ करने वाला तस्वीर पेश की है। बता दें कि शिक्षक का फैसला तब आया जब ग्लेशियर से आई एक आपदा ने उस इलाके को तहस-नहस कर दिया और सैकड़ों लोगों की जान ले ली। यह खबर जानने के बाद आज हर कोई नेपाल के इस शिक्षक के बारे में जानना चाहता है जिसने इंसानियत की मिसाल कायम की है।

नेपाल-तिब्बत बाढ़: कैसे एक शिक्षक ने बचाई 1643 बच्चों की जान

26 अगस्त के सुबह 9:20 बजे नेपाल की त्रिशूली घाटी के करीब नुवाकोट स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र दवाडी को एक दोस्त ने संदेश देते हुए कहा कि, ” गांव खत्म हो गया है, नदी उसे ले जाएगी। तुम जल्दी सुरक्षित स्थान पर भागो” विद्यालय के प्राचार्य राजेंद्र दवाडी कहते हैं कि, उनके तीन मंजिला स्कूल में और उसके आस-पास 1643 बच्चे थे, वह सोच रहे थे कि उनके स्कूल का बिल्डिंग मजबूत हैं। इसी दौरान एक अभिभावक आए और उन्होंने सख्त संदेश सुनाया। इसके बाद तुरंत हमने सभी को लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने का फैसला किया और दवाडी ने विद्यालय की घंटी बजाई और शिक्षकों को कक्षा खाली करने का आदेश दिया। विद्यालय के बस ड्राइवरों को बुलाया, एक को छोड़कर बाकी सबको वापस जाने को कहा।

दवाडी देखते हैं कि, बस पुल पार कर रही है, जिस तक वह नहीं पहुँच सका था। तब तक, बच्चों को यह एहसास होने लगा था कि वे बड़े खतरे में हैं। एक लड़की को पैनिक अटैक आया और उसे मोटरबाइक पर ऊपर की ओर ले जाया गया। बताया जा रहा है कि बाकी बच्चे पैदल भाग गए, और दवाडी उनके पीछे-पीछे गया। बच्चों ने एक बोधि पेड़ के नीचे शरण ली। तब तक बाढ़ का पानी प्राचार्य राजेंद्र दवाडी के स्कूल की बिल्डिंग्स को बहा ले गया था।

एक शिक्षक और जेनरेटर ऑपरेटर की मौत – Nepal Tibet Flood

राजेंद्र दवाडी के अदम्य साहस और तेज सोच ने 1643 बच्चों और शिक्षकों के समूह के एक सदस्य को छोड़कर बाकी सभी को बचा लिया। बताया जाता है कि इस आपदा में समाजिक विज्ञान और इतिहास के शिक्षक सैंटोस परियार और विद्यालय का जेनरेटर ऑपरेटर सुल्तान लामा को नहीं बचाया जा सका। नेपाल बाढ़ में जान गंवाने वाले त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के समाजिक विज्ञान के शिक्षक जिनका उम्र 32 वर्ष था, जो नाश्ता बनाने के लिए नदी के किनारे अपने किराए के कमरे में गए थे, विनाशकारी बाढ़ में बह गए। स्कूल का जेनरेटर ऑपरेटर सुल्तान लामा विद्यालय का दरवाजा बंद करने के लिए लौटने के बाद इस आपदा का शिकार हो गया।

 

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