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New Labour Laws: नए श्रम कानून के “फायदे” तो समझ गए, अब मजदूर संगठनों ने इसके “नुकसान” भी सामने ला दिए हैं! जानकर सोचने पर हो जाएंगे मजबूर

New Labour Laws: केंद्र की मोदी सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि ये चार लेबर कोड श्रमिकों के जीवन में बड़े सुधार लाएंगे। इसके उलट, कई मजदूर संगठन कह रहे हैं कि नए लेबर कानून से मज़दूरों का शोषण बढ़ेगा और इन्हें कैपिटलिस्ट के दबाव में बनाया गया है। अब इसे लेकर देश की राजधानी दिल्ली में भी राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।

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By: Rupesh Ranjan

Published: नवम्बर 28, 2025 6:56 अपराह्न | Updated: नवम्बर 28, 2025 7:48 अपराह्न

Protests against New Labour Laws
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New Labour Laws: हाल ही में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पांच साल पहले बनाए गए चार लेबर कोड को पूरे देश में लागू करने की घोषणा कीं। नए श्रम कानून के साथ मोदी सरकार का पहला मकसद भारत में श्रमिक कानून को आसान बनाना और मज़दूरों के लिए बेहतर वेतन, सुरक्षा, सोशल सिक्योरिटी और भविष्य की भलाई पक्का करना है। इसमें ग्रेच्युटी से जुड़ा एक बड़ा सुधार शामिल है, जिससे मज़दूरों को सबसे ज़्यादा फ़ायदा होने की उम्मीद है।

असल में, इन सबके बीच, मज़दूर संगठनों ने नए लेबर कानून के कई “नुकसान” बताए हैं, जो आपको सोचने पर मजबूर कर सकते हैं। कई श्रमिक संगठन नए श्रम कानून को कामगारों के अधिकारों के खिलाफ बता रहे हैं। इसके बाद से ही पूरे देश में गरमागरम बहस छिड़ गई है।

New Labour Laws का कौन कर रहा है विरोध?

आपको बता दें कि 26 नवंबर को दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों, किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के सदस्यों के एक जॉइंट मंच ने चार लेबर कोड के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किया था। केंद्र की मोदी सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि ये चार लेबर कोड श्रमिकों के जीवन में बड़े सुधार लाएंगे। इनसे मज़दूरों को बेहतर सैलरी, सोशल सिक्योरिटी और एक्सीडेंट के दौरान बचाव, मिनिमम सैलरी और सभी सेक्टर में सैलरी का समय पर पेमेंट जैसे फायदे मिलेंगे।

लेकिन इन सबके बीच मोदी सरकार के उलट, कई मजदूर संगठन कह रहे हैं कि नए लेबर कोड से मज़दूरों का शोषण बढ़ेगा और इन्हें कैपिटलिस्ट के दबाव में बनाया गया है। अब इसे लेकर देश की राजधानी दिल्ली में भी राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।

नए श्रम कानून: मजदूर संगठन क्यों कर रहे हैं विरोध?

मालूम हो कि नए श्रम कानून खिलाफ इंटक, एटक, टीयूसीसी, एईडब्लूए, एचएमएस, सीआईटीयू, एआईयूटीयूसी, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी जैसे मजदूर संगठनों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन कर चुका है। ये सभी 4 लेबर कोड का विरोध जारी रखे हुए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दिए गए एक ज्ञापन में, ट्रेड यूनियनों ने नए लेबर कानून को तुरंत वापस लेने की मांग की।

बता दें कि ज्ञापन में, ट्रेड यूनियनों के जॉइंट फोरम ने कहा कि ये कानून उनके हड़ताल करने के अधिकार को खत्म कर देते हैं। नए श्रम कानून को लागू करने से यूनियनों को रजिस्टर करने में मुश्किलें आएंगी और उनकी मान्यता रद्द करना आसान हो जाएगा, क्योंकि रजिस्ट्रार को यूनियन रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार दिया गया है। कोड में लेबर कोर्ट को खत्म करने और मज़दूरों के लिए ट्रिब्यूनल बनाने का भी प्रावधान है। मंजदूर संगठनों के अनुसार, इससे श्रमिकों के लिए न्याय पाने की प्रक्रिया काफी मुश्किल हो जाएगी।

ये भी पढ़ें: SIR 2025: बंगाल चुनाव पूर्व सरगर्मियों के बीच मतदाता सूची में 26 लाख फर्जी वोट! यूपी में 21 बीएलओ पर कसा कानूनी शिकंजा, जानें डिटेल्स

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Rupesh Ranjan

Rupesh Ranjan is an Indian journalist. These days he is working as a Independent journalist. He has worked as a sub-editor in News Nation. Apart from this, he has experience of working in many national news channels.
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