5वें गोमती पुस्तक महोत्सव का CM Yogi Adityanath ने किया शुभारंभ, जानिए क्यों है यह आयोजन खास

CM Yogi Adityanath: 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ योगी आदित्यनाथ की तरफ से किया गया और यह क्यों खास है और इसका कैसे लोगों को फायदा हो सकता है। आइए जानते हैं इसे लेकर पूरी खबर क्या है।

CM Yogi Adityanath

Photo Credit- Google CM Yogi Adityanath

CM Yogi Adityanath: 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ सीएम योगी आदित्यनाथ की तरफ से किया गया है। 8 दिनों का यह आयोजन कई मायनों में खास होने वाला है। जाहिर तौर पर इस मुहिम से प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जाता है और यह सीएम योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देश पर उत्तर प्रदेश में विकास का पद अग्रसर हो रहा है। आइए जानते हैं 8 दिनों का यह आयोजन क्यों खास होने वाला है और कैसे इसका फायदा लोगों को मिलने वाला है।

CM Yogi Adityanath ने गोमती पुस्तक महोत्सव पर क्या कहा

ज्ञान, साहित्य और संस्कृति का संगम जिस तरह से सीएम योगी के देवता निर्देश पर दिया जा रहा है वह निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ साहित्य और ज्ञान की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काफी हैइसी क्रम में राजधानी लखनऊ में 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव का आयोजन किया गया है, जो पुस्तक प्रेमियों, विद्यार्थियों, साहित्यकारों और बच्चों के लिए ज्ञान एवं रचनात्मकता का विशेष मंच बनेगा।

प्राचीन ज्ञान-परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने के एक अभिनव प्रयास है गोमती पुस्तक महोत्सव

आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से शिक्षा मंत्रालय प्रतिवर्ष देश के अलग-अलग भागों में पुस्तक महोत्सव के माध्यम से अपनी प्राचीन ज्ञान-परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने के एक अभिनव प्रयास को सतत आगे बढ़ा रहा है। इसी शृंखला में आज लखनऊ में 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ किया। सभी बच्चों एवं युवा साथियों को हृदय से बधाई व पुस्तक महोत्सव के प्रति मंगलमय शुभकामनाएं।

क्यों है गोमती पुस्तक महोत्सव खास

इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 12 से 20 सितंबर 2026 तक लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित इस महोत्सव में पुस्तक मेले के साथ बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियां, लेखकों से संवाद के लिए ऑथर्स कॉर्नर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए कल्चरल स्टेज आकर्षण का केंद्र होंगे। यह आयोजन युवाओं और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने, साहित्य से जुड़ाव बढ़ाने और ज्ञान-विचार के स्वस्थ वातावरण को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण वे है।

 

 

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