Punjab News: शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के प्रतिनिधिमंडल ने आज पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात की और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य अमरजीत सिंह चावला पर लगे आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एस.आई.टी.) गठित करने के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग की।
विशेष जांच टीम (एस.आई.टी.) द्वारा उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मांग-पत्र सौंपा
पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष करनैल सिंह पीर मोहम्मद, महासचिव दविंदर सिंह सोढ़ी और भूपिंदर सिंह शेखूपुर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अंतरिंग कमेटी के सदस्य मास्टर मिट्ठू सिंह काहनेके तथा शिरोमणि कमेटी सदस्य जसवंत सिंह पर आधारित प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर शिरोमणि कमेटी सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज एफ.आई.आर. और उसके बाद के घटनाक्रम की विशेष जांच टीम (एस.आई.टी.) द्वारा उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मांग-पत्र सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा, “पिछले कई दिनों से खालसा की जन्मभूमि श्री आनंदपुर साहिब की पवित्र धरती पर विदेश से आई महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म के अमरजीत सिंह चावला पर लगे आरोपों को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है। यह पूरा घटनाक्रम और इससे संबंधित मीडिया रिपोर्टें कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं, जिनकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।”
उन्होंने आगे कहा, “पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाने के लिए एक वरिष्ठ, ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एस.आई.टी.) गठित की जानी चाहिए। जांच 15 दिनों के भीतर तेजी से पूरी की जाए और कानून के अनुसार दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। एस.आई.टी. को यह जांच करने का अधिकार दिया जाना चाहिए कि संबंधित महिला और उसकी बहू को बहरीन से लाने के लिए हवाई टिकटों का प्रबंध किसने किया था।”
उन्होंने आगे बताया, “नई दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचते ही महिला को कथित तौर पर धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार करके नाभा जेल भेज दिया गया था, जहां उसे कथित तौर पर वी.आई.पी. सुविधाएं मिलीं। इस बात की भी जांच की जानी चाहिए कि जेल में रहने के दौरान क्या वह बिक्रम सिंह मजीठिया से मिली थी, जो उस समय वहीं बंद थे। जेल से रिहा होने के बाद महिला को आनंदपुर साहिब के ‘भाई बचित्तर सिंह निवास’ में लाया गया था, इसलिए एस.आई.टी. को जांच करनी चाहिए कि उसे वहां कौन लेकर गया, कौन-सी गाड़ी इस्तेमाल की गई और उसके साथ कौन संपर्क में था।”
निष्पक्ष जांच के माध्यम से इन दावों की सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए
प्रतिनिधिमंडल ने कहा, “मीडिया में चल रही चर्चाओं के अनुसार शिरोमणि यूथ अकाली दल (बादल) के प्रधान सरवजीत सिंह झिंजर ने कथित तौर पर हवाई टिकटों का प्रबंध किया, उसे जेल से रिहा करवाने में मदद की और अकाली नेता विरसा सिंह वल्टोहा से उसका संपर्क करवाया। निष्पक्ष जांच के माध्यम से इन दावों की सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। महिला ने आरोप लगाया है कि श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह ने ड्राइवर मोहन सिंह और मेजर सिंह कविशर के साथ मिलकर उससे फोन पर बातचीत की और आपत्तिजनक संदेश भेजे, जिसकी भी जांच होनी चाहिए।”प्रतिनिधिमंडल ने कहा, “इस बात की भी जांच की जानी चाहिए कि लगभग आठ महीनों के दौरान महिला किस-किस से मिली और इस बात की भी पड़ताल की जानी चाहिए कि शिरोमणि कमेटी ने उसे अपने प्रबंधन और निगरानी में क्यों रखा।”
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जांच के दौरान तख्त श्री केसगढ़ साहिब के प्रबंधक से लेकर ड्यूटी पर तैनात सेवादारों तक संबंधित प्रत्येक व्यक्ति से पूछताछ की जानी चाहिए। इसी तरह एफ.आई.आर. दर्ज होने के बाद इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि अमरजीत सिंह चावला के विदेश जाने में किसने मदद की और उन्हें सुरक्षित रास्ता किसने उपलब्ध करवाया।
उन्होंने आगे कहा, “तख्त श्री केसगढ़ साहिब खालसा की जन्मभूमि है और इस मामले में लगे आरोपों तथा मौजूदा प्रबंधकीय तौर-तरीके ने सिख समुदाय में भारी चिंता और रोष पैदा किया है। इन घटनाओं ने सम्मानित सिख संस्थाओं, विशेष रूप से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब की साख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इससे पूरे सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है, जिसके लिए निष्पक्ष जांच बहुत जरूरी है।”
प्रतिनिधिमंडल ने कहा, “हम आशा व्यक्त करते हैं कि मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री एस.आई.टी. गठित करके सिख समुदाय को न्याय दिलाना सुनिश्चित करेंगे और इस पवित्र धरती पर हुए इस कथित अपराध के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।”
