Punjab News: भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 6 महीनों में 14,032 मरीज़ों को साँस संबंधी बीमारियों का कैशलेस उपचार उपलब्ध, ₹37.30 करोड़ के उपचार का ख़र्च कवर

Punjab News:साँस फूलने को अक्सर सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। लगातार रहने वाली खाँसी को मौसम का असर मान लिया जाता है और घरघराहट (व्हीज़िंग) को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक सीढ़ियाँ चढ़ना भी मुश्किल न हो जाए। तब तक कई मरीज़ गंभीर फेफड़ों की बीमारी का शिकार हो चुके होते हैं, जिसके लिए लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है या फिर बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

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Punjab News:साँस फूलने को अक्सर सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। लगातार रहने वाली खाँसी को मौसम का असर मान लिया जाता है और घरघराहट (व्हीज़िंग) को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक सीढ़ियाँ चढ़ना भी मुश्किल न हो जाए। तब तक कई मरीज़ गंभीर फेफड़ों की बीमारी का शिकार हो चुके होते हैं, जिसके लिए लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है या फिर बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

 

मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत पंजाब के ताज़ा उपचार आँकड़े बताते हैं कि क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारियाँ अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं हैं। अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करवाने वाले मरीज़ों का एक बड़ा हिस्सा राज्य के कामकाजी आयु वर्ग से है, जो यह दर्शाता है कि साँस संबंधी बीमारियाँ स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी तेज़ी से बढ़ा रही हैं।

दवाइयाँ और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से लाभ मिलता है

अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के अनुसार, क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारियाँ धीरे-धीरे विकसित होती हैं और अपने आप ठीक नहीं होतीं। जितनी जल्दी इनका पता चल जाए, फेफड़ों को होने वाले नुकसान को उतना ही अधिक आसानी से रोका जा सकता है। दवाइयाँ और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से लाभ मिलता है। गंभीर मामलों में थोरेसिक सर्जरी जीवन बचा सकती है। ऐसे में इलाज में देरी करना कभी भी सही विकल्प नहीं होता। दुर्भाग्य से इलाज का ख़र्च वहन न कर पाने के कारण कई मरीज़ इलाज में देरी करते हैं।

 

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाई जा रही स्वास्थ्य योजना ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के अंतर्गत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA), पंजाब के साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, 8 जनवरी से 21 जुलाई 2026 के बीच 14,032 लोगों ने फेफड़ों की पुरानी बीमारियों तथा थोरेसिक सर्जरी/साँस संबंधी उपचार का लाभ उठाया। इन उपचारों पर ₹37.30 करोड़ की कैशलेस राशि का भुगतान किया गया। इन आँकड़ों के पीछे उन हज़ारों मरीज़ों की कहानी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने से पहले लाखों रुपये की व्यवस्था करने की चिंता नहीं करनी पड़ी। यही इस योजना की सबसे बड़ी ताक़त है।

 

आँकड़ों के अनुसार, 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 5,559 उपचार मामले दर्ज किए गए, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के 5,659 वरिष्ठ नागरिकों ने भी अस्पताल में उपचार प्राप्त किया। ये दोनों आयु वर्ग मिलकर योजना के तहत हुए कुल साँस संबंधी उपचार मामलों के 80 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखते हैं। इसके अलावा 2,522 युवा वयस्कों तथा 292 बच्चों ने भी साँस संबंधी उपचार प्राप्त किया।

 

लिंग आधारित आँकड़ों के अनुसार, 8,345 पुरुषों का ₹22.79 करोड़ की लागत से उपचार किया गया, जबकि 5,684 महिलाओं को ₹14.50 करोड़ के उपचार का लाभ मिला। इसके अतिरिक्त अन्य (Other) लिंग श्रेणी के तीन लाभार्थियों ने भी योजना के तहत कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

 

मासिक आँकड़े दर्शाते हैं कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान विशेष साँस संबंधी सेवाओं की माँग लगातार बनी रही। उपचार मामलों की संख्या जनवरी में 1,332 से बढ़कर अप्रैल में 2,509 हो गई, जो छह महीनों की अवधि में सबसे अधिक रही। हालाँकि जून में 2,004 मामले दर्ज किए गए, लेकिन उपचार मूल्य ₹6.73 करोड़ रहा, जो सबसे अधिक था। यह दर्शाता है कि योजना के तहत अधिक जटिल और महँगे साँस उपचार भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

अस्थायी समस्या या बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ये आँकड़े साँस संबंधी बीमारियों के प्रति लोगों को अधिक जागरूक करने की तत्काल आवश्यकता को उजागर करते हैं। लोग लगातार रहने वाली खाँसी या साँस फूलने को अक्सर अस्थायी समस्या या बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। दुर्भाग्यवश, दीर्घकालिक फेफड़ों की बीमारियाँ धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट संकेतों के बढ़ती रहती हैं। जब तक कई मरीज़ चिकित्सकीय सहायता लेते हैं, तब तक फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुँच चुका होता है। साँस फूलने की समस्या को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर उपचार से फेफड़ों, जीवन और आजीविका—तीनों को बचाया जा सकता है।”

 

स्वास्थ्य मंत्री ने विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों, औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों तथा धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों से अपील की कि यदि लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने तंबाकू से दूर रहने, प्रदूषित वातावरण के संपर्क को कम करने तथा साँस के पुराने रोगों से पीड़ित लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जाँच करवाने पर भी ज़ोर दिया।

 

बीमारी की समय पर पहचान, तंबाकू का सेवन छोड़ना, वायु प्रदूषण के संपर्क को कम करना, कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय अपनाना तथा समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करना फेफड़ों की पुरानी बीमारियों की रोकथाम और बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता को टालने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।

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