‘किसानों का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक रोटी..,’ सुखबीर बादल के आरोपों पर Bhagwant Mann सरकार मुखर, कटघरे में खड़ा कर दागे सवाल

मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार किसानों को सशक्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में शिरोमणि अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं जिसकी आलोचना मान सरकार कर रही है।

Bhagwant Mann

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Bhagwant Mann: किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर पंजाब में सियासी संग्राम छिड़ा है। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल इस दौरान सरकार पर तमाम गंभीर आरोप लगा रहे हैं। भगवंत मान सरकार जहां एक ओर किसानों की सुविधा के लिए काम कर रही है। वहीं दूसरी ओर बादल परिवार की सियासत कई सवालों को जन्म दे रही है। सभी आरोपों को सिरे से खारित करते हुए भगवंत मान सरकार फ्रंटफुट से मोर्चा संभाल रही है। इसी बीच मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने सुखबीर सिंह बादल और हरसमिरत कौर बादल पर किसानों का इस्तेमाल राजनीतिक रोटी पकाने के लिए लगाए हैं।

सुखबीर बादल के आरोपों पर मुखर हुई Bhagwant Mann सरकार

मान सरकार शिरोमणि अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल के आरोपों पर मुखर है।

सीएम भगवंत मान की कैबिनेट में मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने इसका जिक्र कर कहा कि “सुखबीर या हरसिमरत बादल ने स्वयं किसानों के लिए कब आवाज उठाई? सुखबीर बादल को बाजारों में जाकर किसानों का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक रोटी पकाने के लिए नहीं करना चाहिए। पंजाब इन तीन काले कानूनों की सच्चाई से भलीभांति वाकिफ है। अगर सुखबीर बादल में हिम्मत है, तो कैबिनेट मंत्री को डॉ बलजीत आप के सवालों का जवाब देना चाहिए।” दरअसल, सुखबीर बादल ने लुधियाना में स्थित एशिया की सबसे बड़ी मंडी खन्ना अनाज मंडी का दौरा कर गेहूं खरीदारी में अनियमितता के आरोप लगाए थे। इसको लेकर सरकार अब फ्रंटफुट पर है।

किसानों को सशक्त कर रही मान सरकार की नीतियां!

पंजाब में सीएम भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियां किसानों को सशक्त कर रही हैं। किसानों के खेतों तक नहरी पानी की पहुंच सुनिश्चित करानी हो, या फसलों की सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली की आपूर्ति। भगवंत मान सरकार फ्रंटफुट से मोर्चा संभालते हुए किसानों को सशक्त कर रही है। इतना ही नहीं, किसानों के गेहूं की फसल भी एमएसपी पर खरीद कर सरकार उनके खाते में सीधे भुगतान की राशि भेज रही है। ये सारे कदम सरकार के प्रयासों को दर्शाते हैं कि कैसे किसानों को सशक्त करने की दिशा में नीतियां बनाई जा रही हैं।

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