US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच लगातार टेंशन बढ़ती जा रही है। जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद हो गया है? ताजा रिपोर्टों के मुताबिक स्थिति बेहद गंभीर है।
होर्मुज पूरी तरह से अधिकारिक रूप से बंद घोषित नहीं हुआ है, लेकिन जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट देखी जा रही है और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ रहा है। अगर स्थिति ऐसी ही रही तो भारत समेत दुनिया के कई देशों में एनर्जी संकट गहरा सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल
गौरतलब है कि US-Iran Tension के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। ब्रेट क्रूड ऑयल 108 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका है। ताजा आकंड़ों के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों में भारी गिरावट देखने को मिली है, जो एक चिंता का विषय है। युद्ध से पहले यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में तेल और गैस से जुड़े जहाजों की आवाजाही होती थी।
यही वजह है कि बाजार में यह चिंता तेजी से बढ़ रही है कि अगर तनाव और बढ़ा तो वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। यानि भारत पर भी इसका असर साफ तौर पर पड़ सकता है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का सीधा असर समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है।
भारत समेत दुनिया के कई देशों की बढ़ेगी टेंशन
बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही में लगातार कमी देखी जा रही है। जिसके बाद कई तरह के सवाल उठना शुरू हो गए है कि क्या आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल-़डीजल के दामों में बढ़ोतरी होगी। क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है।
मालूम हो कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में होर्मुज मार्ग में लंबे समय तक बाधा रहने से भारत की तेल खरीद लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर पेट्रोल, डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर भी पड़ने की आशंका रहती है।
