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CM Yogi Adityanath ने बताया क्या है श्रावण का वास्तविक संदेश, जानिए लोगों से किन संकल्पों को लेने का किया जिक्र

CM Yogi Adityanath: श्रावण मास के क्या है मायने और इस दौरान किन संकल्पों को लेने से समाज का विकास संभव है इस बारे में बात करते हुए आखिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की तरफ से क्या कहा गया है। आइए जानते हैं योगी की पाती में क्या संदेश दिया गया।

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By: Anjali Wala

Published: अगस्त 3, 2026 1:05 अपराह्न

CM Yogi Adityanath
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CM Yogi Adityanath: श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही एक अलग उत्साह लोगों के बीच देखा जा रहा है। वहीं इस खास मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने योगी की पाती के जरिए लोगों को अपनी दिल की बात कहते हुए नजर आते हैं। इस दौरान वह कहते हैं कि सावन माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का मन बनाने का संकल्प ले। इस दौरान पौधे के संरक्षण की भी बात करते हैं। योगी की पाती के जरिए आखिर इस बार सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोगों से क्या कहा है। आइए जानते हैं पूरी खबर डिटेल्स में क्या है और किस तरह वह लोगों के लिए उपदेश देते हुए दिखे।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रावण माह में किन संकल्प को बताया यूपी के विकास में जरूरी

दरअसल सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव द्वारा हलाहल कर सृष्टि की रक्षा हेतु किए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है। सावन में ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के पश्चात सामूहिक श्रम से जुड़े लोगों का सहभोज साझा संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। प्रदेश में लगभग 20000 अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं। प्रकृति से जितना ले उतना ही उसे लौटाने का संकल्प भी होना चाहिए। श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का मार्ग बनाने का संकल्प ले। प्रत्येक बूंद का सम्मान तथा प्रत्येक पौधे का संरक्षण करें। यही श्रावण का वास्तविक संदेश है और समृद्ध सुरक्षित तथा विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला भी है।

श्रावण माह को लेकर क्या है CM Yogi Adityanath का संदेश

इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने कैप्शन में लिखा कि “श्रावण माह लोकमंगल, श्रम-सम्मान एवं सामूहिकता का पावन पर्व है। प्रकृति नवसृजन का संदेश देती है तथा अन्नदाता का परिश्रम हरित समृद्धि के रूप में फलीभूत होने लगता है। सनातन संस्कृति में प्रकृति का यही नवोन्मेष शिव-आराधना से जुड़कर जीवन को संयम, सेवा और समरसता का मार्ग दिखाता है। देवाधिदेव महादेव स्वयं प्रकृति बोध के देवता हैं। उनकी जटाओं में प्रवाहित गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, कंठ का सर्प, नंदी जी और उनके गण, हमें प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का संदेश देते हैं।”

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Anjali Wala

अंजलि वाला पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता में हैं। साल 2019 में उन्होंने मीडिया जगत में कदम रखा। फिलहाल, अंजलि DNP India वेब साइट में बतौर Sub Editor काम कर रही हैं। उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में मास्टर्स किया है।
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