CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के विकास में वाराणसी का एक खास योगदान है जहां इस महानगरी को खूबसूरत बनाने के लिए सरकार की तरफ से हर संभव प्रयास किया जा रहा है। वहीं इस सब के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी है। आइए जानते हैं आखिर क्यों यह खास है और सीएम योगी आदित्यनाथ की पहल को दिखाने के लिए काफी है। यह राज्य के विकास को बखूबी बयां करती है और इससे निश्चित तौर पर कनेक्टिविटी को मदद मिल सकती है।
क्या है CM Yogi Adityanath की पहल से 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के फायदे
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी है। pic.twitter.com/8e61k8Njcq
— Government of UP (@UPGovt) July 15, 2026
गवर्नमेंट ऑफ़ यूपी ने इस बात की जानकारी दी है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी है। इसके साथ ही बताया गया कि वाराणसी को 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर मिलेगा। केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति से एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा।
46.039 किमी लंबी परियोजना से निर्बाध कनेक्टिविटी को नई गति देने के लिए कितनी है लागत
सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार में उत्तर प्रदेश के वाराणसी के परियोजना में रैंप, लूप और फुट ओवर ब्रिज का भी निर्माण होग। 14,447.64 करोड़ लागत की 46.039 किमी लंबी परियोजना से निर्बाध कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी। जाहिर तौर पर यह परियोजना वाराणसी और वहां के लोगों के लिए एक खास तोहफा है। जहां न सिर्फ एनएच 19 मिलने वाला है बल्कि फुट ओवर ब्रिज ब्लू का भी निर्माण किया जाएगा। जाहिर तौर पर इस प्रोजेक्ट के जरिए उत्तर प्रदेश के विकास में अहम योगदान मिलने वाला है।
जाहिर तौर पर इस कॉरिडोर के बनने से वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और बनारस के प्रमुख घाटों तक पहुंचा लोगों के लिए आसान हो सकता है। यह मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ की पहल से वाराणसी की परिवहन व्यवस्था को एक नई गति मिल सकती है।







