चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में टूट! बीजेपी के नए दांवे से Akhilesh Yadav की उड़ी नींद, समझे इसके मायने

Akhilesh Yadav: विधानसभा चुनाव में महज कुछ महीनों का ही समय बच गया है। उससे पहले समाजवादी पार्टी में लगातार टूट की खबरे सामने आ रही है।

Akhilesh Yadav

फाइल फोटो

Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा चुनाव में महज कुछ महीनों का ही समय बच गया है। उससे पहले समाजवादी पार्टी में लगातार टूट की खबरे सामने आ रही है हालांकि सपा के नेताओं ने इससे साफ इंकार किया है और इसे बीजेपी की नई चाल बताई है। बता दें कि पहले टीएमसी और फिर यूबीटी के सांसद बागी हो गए है।

जिसके बाद लगातार यह दावा किया जा रहा है कि सपा पार्टी के कुछ सांसद और विधायक बीजेपी के संपर्क में है। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है, कि क्या समाजवादी पार्टी टूट के कगार पर है और अगर ऐसा होता है तो ये Akhilesh Yadav की आने वाले दिनों में टेंशन बढ़ सकती है। हालांकि अधिकारिक तौर पर इसे लेकर किसी प्रकार की जानकारी सामने नहीं आई है।

यूपी के मंत्री ने किया बड़ा दावा – Akhilesh Yadav

पहले ओमप्रकाश राजभर और अब यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा कि “ऐसे लगभग दो दर्जन सांसद हैं जो हिंदुत्व की विचारधारा को मानते हैं। उन्हें उम्मीद थी कि INDIA गठबंधन सत्ता में आएगा, लेकिन ऐसा कैसे हो सकता था? चाहे कोई नेता हो, विधायक हो या सांसद, वे लोगों के लिए संवैधानिक अधिकारों, सम्मान, सुरक्षा, समृद्धि और आत्मनिर्भरता को तभी सुनिश्चित कर सकते हैं जब वे सरकार के साथ हों।
हिंदू विचारधारा वाले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के सभी सांसद अवसर तलाशने और दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) से संपर्क साधने के लिए हमसे लगातार मिलते रहते हैं… इनकी संख्या कम से कम 24 दर्जन से अधिक होनी चाहिए”।

चुनावी समीकरणों पर क्या पड़ेगा असर?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में किसी भी बड़े नेता या प्रभावशाली समूह के पार्टी बदलने से चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है।

हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल नेताओं के आने-जाने से चुनावी परिणाम तय नहीं होते। जनता के मुद्दे, स्थानीय परिस्थितियां, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और चुनावी अभियान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाजवादी पार्टी का आरोप है कि भाजपा विपक्ष को कमजोर करने के लिए विभिन्न राजनीतिक हथकंडे अपना रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि विपक्ष के नेताओं का भरोसा अपनी ही पार्टियों से उठ रहा है, इसलिए वे भाजपा का रुख कर रहे हैं। वहीं अब देखना दिलचस्प होगा कि Akhilesh Yadav इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देते है।

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