Lucknow News: लखनऊ में मच्छरों के सफाए के लिए चलेगा विशेष अभियान, अब डीजल से नहीं कोल्ड फॉगिंग से मरेंगे मच्छर

Lucknow News: बरसात के दौरान बढ़ते मच्छरों पर काबू पाने के लिए अब लखनऊ में विशेष अभियान चलाया जाएगा। डीजल की जगह अब कोल्ड फॉगिंग से मच्छरों का सफाया होगा।

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Lucknow News: बरसात के दौरान बढ़ते मच्छरों पर काबू पाने के लिए अब लखनऊ में विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत मच्छरों के सफाए के लिए डीजल की जगह अब कोल्ड फॉगिंग का इस्तेमाल होगा।

दरअसल, पहले मच्छरों को मारने के लिए डीजल फॉगिंग की जाती थी। इसमें डीजल में कीटनाशक मिलाकर जगह-जगह छिड़काव किया जाता था। लेकिन, कोल्ड फॉगिंग में पानी का इस्तेमाल किया जाता है। यानी मच्छरों को भगाने के लिए अब पानी और कीटनाशक के मिश्रण का इस्तेमाल होगा। जो फायदेमंद होने के साथ-साथ बजट के अनुकूल भी होगा।

सालाना डीजल पर खर्च होते थे 5 करोड़ रुपये

डीजल और कीटनाशक मिलाकर मच्छर मारने की प्रक्रिया कितनी महंगी है, इसका अंदाजा आप सालाना डीजल के खर्च ले लगा सकते हैं। अभी नगर निगम फॉगिंग पर सालाना 8 से 10 करोड़ रुपये खर्च करता है। जिसमें आधे से ज्यादा खर्चा तो डीजल पर आ जाता है।

निगम सालाना 5 करोड़ रुपये डीजल पर खर्च करता है। ऐसे में अगर डीजल की जगह पानी का इस्तेमाल किया जाता है तो इससे पैसों की काफी बचत होगी।

डीजल से नहीं अब कोल्ड फॉगिंग से मरेंगे मच्छर

नगर स्वास्थ्य अधिकारी सुनील रावत ने बताया कि इस समय निगम के पास 45 बड़ी और 110 छोटी फॉगिंग मशीनें हैं। इनका इस्तेमाल शहर में मच्छरों को मारने के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि बड़ी मशीन में जहा 60 लीटर डीजल खर्च होता है। वहीं, छोटी मशीन की कैपेसिटी 8 लीटर की है।

उन्होंने बताया कि फॉगिंग मशीनों को चलाने के लिए पेट्रोल का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे खर्च और बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि बड़ी मशीनें वाहनों पर लगी होती हैं, ऐसे में वाहनों के पेट्रोल का खर्च, गड़ी के चालक का खर्च मिलाकर निगम को हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन, अब डीजल की जगह कोल्ड फॉगिंग की जाएगी। जिसके लिए नई मशीनें खरीदने के बजाय पुरानी मशीनों में बदलाव किए जाएंगे।

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