UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव का आगाज 2027 में होगा। इस बार के चुनाव में सियासी मुकाबला सिर्फ जाति और पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित नहीं दिख रहा है। यूपी के मतदाताओं में लगभग आधी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। यही वजह है कि महिलाओं पर सभी दलों का विशेष ध्यान है। सभी राजनीतिक दल इन बातों को भली भांति समझती हैं कि अगर महिलाएं उनके समर्थन में आ गईं, तो चुनाव में जीत दर्ज करना तकरीबन आसान हो सकता है।
मालूम हो कि 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 13.39 करोड़ हैं। जिनमें 6.09 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 45.46% है, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 54.54% है। चुनावों में अक्सर देखा गया है कि महिलाएं जिस पार्टी का समर्थन करती हैं तो दिल खोलकर। इसका परिणाम हाल के चुनावी नतीजों को देखकर समझा जा सकता है।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में ‘बहू कनेक्शन’ क्या है?
उत्तर प्रदेश में महिला मतदाताओं को साधने के लिए राजनीतिक दल अलग-अलग रणनीति अपनाती दिख रही हैं। खासकर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने मास्टरस्ट्रोक चला है। यूपी चुनाव से पहले, इन राजनीतिक पार्टियों ने महिला मतदाताओं को मुहिम का हिस्सा बनाने के लिए “बहू कनेक्शन” शुरू किया है, जिससे लोगों में चर्चा हो रही है। इसके अलावा यह कैंपेन सीधे महिला मतदाताओं को उनके समुदाय के टॉप शीर्ष नेतृत्व से जोड़ रहा है और उनके विचार शेयर कर रहा है। डिंपल यादव की सक्रियता को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हैं, लेकिन इन सबके बीच जयंत चौधरी ने अपनी पत्नी चारू चौधरी को चुनावी मंच पर लेकर आ गए हैं। इसके साथ चारू सोशल मीडिया की सनसनी बन गई हैं। लोग डिंपल और चारू के बीच समानता के गुण तलाश रहे हैं।
UP Election 2027: भाजपा से लेकर सपा तक महिलाओं पर फोकस
दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ दल भाजपा कल्याणकारी योजनाओं के वितरण, विशेष रूप से सीधे परिवारों तक पहुंचने वाली योजनाओं के इर्द-गिर्द एक राजनीतिक माहौल बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। इस बीच, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सत्ता में वापसी होने पर महिलाओं के लिए 40000 रुपये की वार्षिक सहायता,छात्राओं को मुफ्त बस-मेट्रो यात्रा और 12वीं पास छात्राओं को लैपटॉप देने जैसे वादे की घोषणा कर चुनावी लड़ाई को और भी तेज कर दिया है। इससे साफ है कि 2027 से पहले महिला मतदाता सभी प्रमुख दलों के चुनावी एजेंडे में अहम स्थान हासिल कर चुकी हैं।
