UP News: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मेरठ के शास्त्रीनगर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की नींव सपा सरकार ने ही रखी थी, जब भ्रस्टाचार के चलते सभी नियमों व मानकों को ताख पर रख दिया गया था। समाजवादी पार्टी के शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार व नियमों की अनदेखी का परिणाम है कि मेरठ के लोगों को आज ध्वस्तीकरण की पीड़ा झेलनी पड़ रही है। तथ्य यह भी है कि योगी सरकार मेरठ के इन लोगों को ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लगातार जूझती रही है।
पूर्व सरकार में नियमों की अनदेखी के कारण ही सुप्रीम कोर्ट ने सख्त फैसला दिया
उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक स्थानीय निवासियों के सिर से ध्वस्तीकरण की तलवार हटाने के लिए योगी सरकार 2025 में बाईलॉज लेकर आई, लेकिन पूर्व सरकार में नियमों की अनदेखी के कारण ही सुप्रीम कोर्ट ने सख्त फैसला दिया और सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में लगातार यह प्रयास करती रही है कि किसी तरह लोगों की रोजी रोटी और आशियाना बच जाए।
सूत्रों ने बताया कि मेरठ सेंट्रल मार्केट इलाके में किए जा रहे अवैध निर्माणों पर आवास विकास के अभियंताओं व अन्य कार्मिकों ने वर्ष 2013 में लगातार जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक-पुलिस अधिकारियों को लिखित आपत्तियां भेजीं। यहां तक कि कुछ मामलों में परिषद के अभियंताओं ने एफआईआर भी दर्ज करवाई, लेकिन भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी सपा सरकार के अफसरों के कान में जूं नहीं रेंगी। कई मामलों में परिषद के अभियंताओं पर राजनीतिक दबाव डाला गया और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दी गई। सपा सरकार ने भी आवास विकास परिषद की नहीं सुनी।
तमाम प्रकरणों की जानकारी शासन-प्रशासन को उपलब्ध कराई गई
नतीजा यह कि आवासीय भू-संपत्तियों पर बेरोकटोक अवैध व्यावसायिक ढांचे खड़े होते चले गए। परिषद ने एक-एक कर अवैध निर्माण से जुड़े तमाम प्रकरणों की जानकारी शासन-प्रशासन को उपलब्ध कराई गई, लेकिन किसी ने इस पर कोई कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा। नतीजतन, मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। सपा सरकार ने भ्रष्टाचार व लापरवाही के कारण तय मानकों का पालन नहीं किया, जबकि योगी सरकार ने इस मामले में लगातार पीड़ित व्यापारियों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की। मेरठ में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सपा के भ्रष्टाचार और लापरवाही का ही नतीजा है।
