UP Politics: संगठन की रणनीति और बूथ लेवल पर अपनी कुशल मैनेजमेंट के बल पर बीजेपी ने बंगाल जैसे अभेद किले को जीत लिया है। ममता बनर्जी जैसी मजबूत क्षत्रप को बीजेपी बंपर अंतर के साथ हराने में कामयाब रही। इसके बाद बीजेपी का अगला लक्ष्य पंजाब है। उससे पूर्व अमित शाह और संगठन के माहिर खिलाड़ी सुनील बंसल की जोड़ी यूपी कूच कर सकती है।
कहते हैं दिल्ली का रास्ता लखनऊ से जाता है। यही वजह है कि सबकी नजरें यूपी पर टिकीं हैं जहां से अगले वर्ष 403 विधायक चुने जाएंगे। 2017 में बतौर प्रभारी अमित शाह और संगठन महामंत्री के पद पर रहते हुए सुनील बंसल ने यूपी में बीजेपी की सत्ता वापसी में अहम भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि अब अखिलेश यादव की पीडीए स्ट्रैटजी के खिलाफ बीजेपी की नई रणनीति को लेकर चर्चा जारी है।
बंगाल विजय के बाद यूपी कूच करेगी शाह-बंसल की जोड़ी!
यूपी राजनीति के लिहाज से कितना अहम है इसका अंदाजा यहीं से लगा लीजिए कि यूपी से मिली एकतरफा लीड ने 2014 में केन्द्र सरकार को बड़ी बढ़त दी थी। यहां 80 लोकसभा तो 31 राज्यसभा सीटें हैं जो राष्ट्रीय राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। सूबे में 403 विधानसभा की सीटे हैं जिनका अहम महत्व है। वर्ष 2017 में सपा के खिलाफ मजबूती से चुनाव लड़ते हुए बीजेपी ने यूपी जीत लिया था। 2022 में ये जारी रहा।
अब बारी 2027 विधानसभा चुनाव की है। इसको लेकर बीजेपी आलाकमान पहले ही अलर्ट है। खबरों की मानें तो 2017 में यूपी के प्रभारी रहे अमित शाह और तब संगठन की कमान संभाल चुके सुनील बंसल फिर यूपी लौट सकते हैं। यहां दोनों को अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है, ताकि 2027 में बीजेपी हैट्रिक लगा सके। इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ना तय है। यदि बीजेपी लगातार तीसरी बार जीती, तो दिल्ली में उसका दबदबा बढ़ेगा।
हाईकमान बखूबी समझता है कि स्थानीय स्तर पर सत्ता-विरोधी लहर और विभिन्न समुदायों में प्रतिनिधित्व की बढ़ती अपेक्षाए पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। सूबे में सामाजिक सामंजस्य को साधना भी बेहद अहम है। बंगाल में बीजेपी ने बखूबी रणनीति साधते हुए ममता बनर्जी को धराशायी किया है। यही वजह है कि बंगाल जीत में अहम भूमिका निभाने वाली अमित शाह और सुनील बंसल की जोड़ी के यूपी कूच करने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
अखिलेश यादव की PDA रणनीति के खिलाफ BJP का प्लान क्या?
सूबे में समाजवादी पार्टी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। अखिलेश यादव आए दिनों मीडिया से वार्ता करते हुए 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जिक्र करते हैं। वे यूपी के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर रहे हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने पीडीए रणनीति के तहत 37 सीटें जीत ली थीं। बीजेपी को उस चुनाव में सपा ने बड़ा झटका दिया था।
यही वजह है कि सपा के हौसले बुलंद हैं। 2024 में झटका खा चुकी बीजेपी अब सपा के खिलाफ मजबूत रणनीति बनाने में जुट गई है। इसी क्रम में जातिवाद की राजनीति का आरोप लगाकर बीजेपी आक्रामक रहती है। संगठन स्तर पर भी विस्तार हो रहा है। सभी वर्गों में सामंजस्य साधने की जुगत जारी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 2027 में इन प्रयासों का क्या असर होता है।
