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Chhath Puja 2024: छठ नहाय-खाय पर जानें , गंगा में धोया हुआ सारा पाप कहां जाता है?

Chhath Puja 2024: छठ पर नहाय खाय की शुरुआत के साथ गंगा नहाने का प्रावधान है और इसकी अपनी एक अलग मान्यता है। लेकिन क्या आप कभी सोचे हैं कि गंगा में धुले हुए पाप कहां जाते हैं। अगर नहीं तो आइए जानते हैं दिलचस्प किस्सा।

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By: Anjali Wala

Published: नवम्बर 5, 2024 9:21 पूर्वाह्न

Chhath Puja 2024
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Chhath Puja 2024: मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए छठी मैया और भगवान सूर्यदेव की पूजा करने से पहले व्रती गंगा (Ganges) स्नान करती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा स्नान करने से शुद्धता आती है और सभी पाप धूल जाते हैं। ऐसे में छठ पर्व (Chhath Puja 2024) की शुरुआत आज नहाय खाय से होने के साथ आज गंगा स्नान की अपनी मान्यता है। यही वजह है कि छठ व्रती व्रत का संकल्प लेने से पहले गंगा या किसी भी नदी में जाकर स्नान करती हैं ताकि सभी पाप और अपवित्रता धूल जाए। किसी भी खास अवसर पर गंगा स्नान करने का काफी महत्व देखा जाता है और इसके लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। हालांकि इस सब से परे क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर गंगा में धूले पाप जाते कहां हैं। अगर सोचे तो यह काफी दिलचस्प है तो ऐसे में नहाय खाय के मौके पर आइए जानते हैं कि आखिर गंगा में जाकर धोए गए पाप कहां है।

Chhath Puja 2024: नहाय खाय पर जानिए यह दिलचस्प किस्सा

पौराणिक कहानियों की माने तो एक बार एक ऋषि के दिमाग में यह आया कि लोग गंगा में पाप धोने जाते हैं तो इसका मतलब पाप गंगा में ही होंगे और गंगा भी पापी है। ऋषि की जानने की इच्छा बढ़ी और वह तपस्या करने के बाद भगवान से पूछा कि जो पाप गंगा में धोया जाता है वह आखिर कहां जाता है। इस पर भगवान ने कहा इस बात को जानने के लिए तो गंगा के पास ही जाना पड़ेगा चलो पूछते हैं। अब दोनों गंगा के पास पहुंचते हैं और उनसे पूछते हैं कि जो लोग आपके यहां पाप धोने के लिए आते हैं वो पाप कहां जाते हैं। गंगा कहती है “मैं सारे पाप समुद्र में जाकर बहा देती हूं।

ऐसे में इस बात को जानने के लिए वे समुद्र के पास पहुंचते हैं और उनसे वही सवाल करते हैं। इस पर समुद्र का जवाब होता है कि “मैं सभी पाप को भाप बनाकर बादल बना देता हूं।” ऐसे में अपने सवाल का जवाब ढूंढने ऋषि सभी लोगों के साथ बादल के पास पहुंचते हैं और उनसे कहते हैं कि अगर आपके पास पाप आए हैं तो आप पापी हुए। इस पर बादल का जवाब होता है कि वो सभी पापों को पानी बरसा कर वापस धरती पर भेज देते हैं जिससे अन्न उपजता है और लोग उसे ग्रहण करते हैं। अब जिस भी मानसिकता से मानव ग्रहण करते हैं उसी अनुसार उनकी मानसिकता बनती है इसीलिए कहते हैं ‘जैसा खाए अन्न, वैसा बनता मन।’

हिंदू धर्म में गंगा नहाने का महत्व

ऐसे में गंगा में धुले हुए पाप कहां जाते हैं इसका जवाब यही है कि जो मानव गंगा में धोते हैं वह किसी तरह से वापस उन्हीं के पास पहुंच जाता है वह भी अन्य माध्यम से। हालांकि यह सिर्फ पौराणिक मान्यता है लेकिन हिंदू धर्म में गंगा नहाने को काफी महत्व दिया जाता है। गंगा नहाने के लिए किसी भी खास मौके पर लोगों के भीड़ जमा होती है। कहते हैं गंगा नहाने से सभी मनोरथ पूर्ण होने के साथ-साथ मन में शुद्धता आती है।

Chhath Puja 2024 की आज से शुरुआत

वहीं दूसरी तरफ छठ पूजा की बात करें तो नहाय खाय के साथ आज यानी 5 नवंबर से इस लोकआस्था के पर्व की शुरुआत हुई है। 4 दिनों का यह पर्व शुरू हो चुका है। 6 नवंबर को खरना पूजा किया जाएगा जब लोग रोटी और खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे। 7 नवंबर को संध्या अर्घ्य यानी ढलते हुए सूरज की पूजा होगी तो वही 8 नवंबर को उगते हुए सूरज की पूजा की जाएगी।

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Anjali Wala

अंजलि वाला पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता में हैं। साल 2019 में उन्होंने मीडिया जगत में कदम रखा। फिलहाल, अंजलि DNP India वेब साइट में बतौर Sub Editor काम कर रही हैं। उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में मास्टर्स किया है।
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