Mahabharata: दूसरे को परास्त करना असली शक्ति का मतलब नहीं होता है बल्कि असली बल क्या होता है यह हनुमान और भीम की मुलाकात के समय पता चला था जो महाभारत की एक अनकही कहानी है। शक्ति विनम्रता और धर्म का अद्भुत पाठ जो महाभारत की अनकही कहानी को दिखाती है जहां बताया गया कि आखिर असली शक्ति के मायने क्या हैं। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि हनुमान और भीम की मुलाकात क्यों महाभारत काल में खास रही है और इसका क्या महत्व है। इस मुलाकात को शक्ति, विनम्रता और धर्म का अद्भुत पाठ क्यों कहा गया है।
महाभारत की अनकही कहानी जो बताता है कि क्या है असली बल
जहां तक भीम और हनुमान जी की मुलाकात की बात करें तो यह गंधमादन पर्वत पर हुई थी जहां हनुमान जी ने वृद्ध वानर के रूप में भीम के अहंकार को तोड़ा था। कहानी की बात करें तो वनवास के दौरान द्रौपदी की इच्छा पूरी करने के लिए सौगंधकमल लेने जा रहे भीम ने अपनी ताकत के घमंड में वृद्ध वानर से पूछ हटाने के लिए कहा था। जब हनुमान जी ने मूछ हटाने के लिए मना किया तब भीम ने जबरदस्ती कोशिश तो लेकिन हिला भी नहीं सके और ऐसे में उन्होंने हार मान ली थी।
हनुमान जी ने भीम को पढ़ाया शक्ति विनम्रता और धर्म का अद्भुत पाठ
शक्ति विनम्रता और धर्म का अद्भुत पाठ पढ़ाते हुए हनुमान जी ने भीम को यह समझाया कि शक्ति का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए होना चाहिए ना कि किसी ऐसे पर जो कमजोर है। इस दौरान अहंकार का दमन हुआ जहां भीम ने पूछ हटाने की कोशिश की लेकिन वह उसे हिला भी नहीं पाए। वहीं यह भी कहा जाता है कि हनुमान जी ने भीम को आशीर्वाद दिया कि महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ के ध्वज बनकर रहेंगे। इसके साथ ही हनुमान जी ने भीम को असली बल का पाठ पढ़ाया और कहा कि बल तभी सार्थक है जब वह विनम्रता, धर्म के साथ हो अन्यथा वह निरर्थक है।
