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Pradosh Vrat 2023: प्रदोष व्रत से मिट जाते हैं सारे पितृ दोष, जानें किन चीजों के दान से मिलती है भोलेनाथ की कृपा

प्रदोश व्रत पूरी तरह से भगवान शंकर को समर्पित होता है. पितृ पक्ष में पड़ने वाले प्रदोश व्रत पर आज आपको कुछ खास वस्तुओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके दान से न केवल पुण्य प्राप्त होगा बल्कि सारे पितृ दोष भी मिट जाएंगे.

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By: Deepika Pandey

Published: अक्टूबर 11, 2023 5:52 पूर्वाह्न

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Pradosh Vrat 2023: वैसे तो प्रदोष तिथि हर महीने ही आती है, मगर कुछ विशेष अवसरों पर इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. अश्विन माह के पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि को विशेष फलदायी माना जाता है. पचांग के मुताबिक इस बार यह आज यानि 11 अक्टूबर को पड़ने जा रही है, बता दें कि यह प्रदोश व्रत पूरी तरह से भगवान शंकर को समर्पित होता है. ऐसे में आज आपको कुछ खास वस्तुओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके दान से न केवल पुण्य प्राप्त होगा बल्कि सारे पितृ दोष भी मिट जाएंगे.

त्रयोदशी व्रत का महत्व

हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर व्रत आदि रखने का काफी महत्व है मान्यताओं के अनुसार शिव जी को यह व्रत काफी प्रिय है जिसे मन से करने से सारे पाप दोष मिट जाते हैं. वहीं पितृ पक्ष की त्रयोदशी तिथि का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन किये जाने वाले कुछ विशेष दान इस प्रकार से हैं-

अनाज का दान है सबसे बड़ा

भगवान शिव को मुक्ति दाता भी कहा जाता है ऐसे में किसी को अनाज का दान करने से भगवान भोले प्रसन्न होते हैं. ऐसा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है, साथ ही पितरों की कृपा भी बनी रहती है.

उड़द की दाल के दान है फलदायी

बता दें कि पितृ पक्ष के दौरान उड़द की दाल का खासा महत्व होता है वहीं भगवान शंकर को भी यह काफी पसंद है. इस तिथि पर उड़द की दाल दान करने से महादेव प्रसन्न होते हैं साथ भी पितरों को भी मुक्ति मिलने में आसानी रहती है.

वस्त्रों का दान से आएगी समृद्धी

कपड़ों के दान को अच्छा बताया गया है अगर किसी जरूरत मंद को वस्त्र दान कर दिये जाए तो महादेव ऐसे लोगों से जल्दी प्रसन्न करते हैं और उनकी मनोकामनाओं को शीघ्र ही पूरा करते हैं. त्रयोदशी पर इस दान से प्रभु की कृपा बनी रहती है.

प्रदोष व्रत विशेष

दान और धर्म से भरे हुए इस दिन पर भगवान शंभू का आशीर्वाद पाने के लिए पहले सुबह नहा धोकर साफ कपड़े पहनकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि समर्पित कर व्रत करने का संकल्प लें. इसके बाद भोले के मंत्र ओम नम् शिवाय का जाप करते हुए दान दक्षिणा करें. वहीं इस दिन पितरों का श्राद्ध और दान आदि भी कर सकते हैं.  

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