Rahu Kaal February 2026: माघ का महीना समाप्त होने के साथ फाल्गुन की शुरुआत कुछ दिन पहले ही हो गई है। इस फाल्गुन मास में तमाम मांगलिक कार्यक्रमों और अनुष्ठानों का होना तय है। कहीं विवाह संपन्न होंगे, तो कहीं मुंडन, उपनयन संस्कार व अन्य अनुष्ठान होना है। मांगलिक कार्यक्रमों के दौरान लोग राहु काल का विशेष ख्याल रखते हैं।
मान्यता है कि राहु काल में कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए अथवा इसके परिणाम बुरे हो सकते हैं। ऐसे में आइए हम आपको इस मान्यता के आधार पर ही पूरे फरवरी 2026 माह के राहु काल बता देते हैं। यदि आप चाहें तो इस राहु काल के दौरान शुभ कार्यों की शुरुआत ना कर, पश्चाताप से बच सकते हैं।
जानें पूरे महीने का राहु काल!
पंचांग या अन्य धार्मिक ग्रंथों से ली गई जानकारी के आधार पर गूगल फरवरी 2026 में राहु काल की जानकारी मुहैया कराता है। गूगल एआई पर दर्ज जानकारी के मुताबिक फरवरी 2026 माह में राहु काल की अवधि इस प्रकार है –
सोमवार (2, 9, 16, 23 फरवरी): सुबह 08:30 से 10:00 तक.
मंगलवार (3, 10, 17, 24 फरवरी): दोपहर 03:00 से 04:30 तक.
बुधवार (4, 11, 18, 25 फरवरी): दोपहर 12:00 से 01:30 तक.
गुरुवार (5, 12, 19, 26 फरवरी): दोपहर 01:30 से 03:00 तक.
शुक्रवार (6, 13, 20, 27 फरवरी): सुबह 10:30 से 12:00 तक.
शनिवार (7, 14, 21, 28 फरवरी): सुबह 09:00 से 10:30 तक.
रविवार (1, 8, 15, 22 फरवरी): शाम 04:30 से 06:00 तक.
इस अवधि के दौरान किसी भी शुभ कार्य, अनुष्ठान करने की मनाही होती है। ऐसे में यदि आप चाहें तो पूरे फरवरी माह की राहु काल का गणना कर इस अवधि के दौरान शुभ कार्य करने से बच सकते हैं।
क्या होता है राहु काल जिस दौरान शुभ कार्यों पर रहती है रोक?
ज्योतिष विधा के अनुसार राहु काल हर दिन लगता है। सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच 90 मिनट की एक अशुभ अवधि आती है। मान्यता है कि राहु के प्रभाव से इस अवधि के दौरान किसी नए या शुभ कार्य का करना अनिष्टकारी हो जाता है।
यही वजह है कि ज्योतिष राहु काल के दौरान शुभ कार्यों को करने से मना करते हैं। राहु काल का समय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर तय होता है। जिन लोगों पर भी राहु की नजर हो उन्हें आम तौर पर भगवान शिव और उनके अवतार काल भैरव, व मां दुर्गा की पूजा करने की सलाह दी जाती है।
Disclaimer: यहां साझा की गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है। डीएनपी इंडिया/लेखक इन बातों की सत्यता का प्रमाण नहीं प्रस्तुत करता है।
