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विवादों से घिरे महादेव के इस मंदिर के सिर्फ एक दिन ही खुलते है कपाट, जानें इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें

Sawan 2023: 4 जुलाई से सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है। इस साल का सावन का महीना बेहद खास बताया जा रहा है क्योंकि इसमें चार सोमवार नहीं बल्कि 8 सोमवार पड़ रहे है। ऐसे में आपको बता दे कि, सावन के महीने में लोग शिवजी की पूजा करते हैं। वही उनको खुश ...

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By: Anjali Sharma

Published: जुलाई 14, 2023 10:15 पूर्वाह्न

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Sawan 2023: 4 जुलाई से सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है। इस साल का सावन का महीना बेहद खास बताया जा रहा है क्योंकि इसमें चार सोमवार नहीं बल्कि 8 सोमवार पड़ रहे है। ऐसे में आपको बता दे कि, सावन के महीने में लोग शिवजी की पूजा करते हैं। वही उनको खुश करने के लिए उनके भक्त सावन में कांवड़ लेकर व्रत के कई तरीके अपनाते हैं। इसी के साथ महादेव के भक्त उनसे आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर में जाकर उनकी पूजा अर्चना भी करते हैं। वैसे तो भगवान शिव के कई अनोखे मंदिर है लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो साल में से एक बार खुलता है और यहां दर्शन करने के लिए लाखों की संख्या में भक्त आते हैं।

एक ही दिन खुलते हैं इस मंदिर के कपाट

इसी कड़ी में आपको बता दें कि, हम महादेव के जिस अनोखे मंदिर की बात कर रहे हैं वो मध्य प्रदेश के रायसेन दुर्ग में मौजूद है। मध्य प्रदेश के रायसेन दुर्ग में स्थित भगवान शिव के इस मंदिर के कपाट साल में सिर्फ 1 दिन खुलते हैं। इस मंदिर के कपाट महाशिवरात्रि के दिन सुबह 6 बजे खुलते हैं और 12 बजे बंद हो जाते हैं। दरअसल ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस मंदिर का इतिहास काफी विवादों से जुड़ा हुआ है जिसकी वजह से इस मंदिर के पट केवल 1 दिन खुलते हैं।

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मनोकामना पूरी करने के लिए करें ये काम

ऐसे में महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के दर्शन करने के लिए इस मंदिर में भक्तों की भीड़ जमा हो जाती है। आपको बता दें कि, महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर के पास एक मेले का आयोजन भी किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि, अगर आप इस मंदिर में जाएं और मंदिर के कपाट बंद हो तो आप अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए जहां गेट पर कपड़ा बांध सकते हैं।

विवादों से घिरा हैं मंदिर का इतिहास

वहीं अगर इस मंदिर के इतिहास की बात करें तो ऐसा कहा जाता है कि, इस मंदिर का निर्माण 12वीं सदी में किया गया था। परंतु मुगल शासन होने के कारण इस मंदिर के कपाट साल 1974 तक बंद रहे थे लेकिन इसके बाद एक मुहिम के चलते इस मंदिर के कपाट दोबारा खोले गए। ऐसे में 1974 से अब तक इस मंदिर के कपाट सिर्फ शिवरात्रि के दिन में कुछ घंटों के लिए खोले जाते हैं।

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Anjali Sharma

अंजलि शर्मा पिछले 2 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हैं। अंजलि ने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल अंजलि DNP India Hindi वेबसाइट में कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं।
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