Jharkhand Protest:रांची में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच वार्ता खत्म, छात्र बोले- बातचीत सकारात्मक, भरोसे का इंतजार

Jharkhand Protest:झारखंड में JPSC-JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच शनिवार को स्टेट गेस्ट हाउस में अहम बैठक हुई। सरकार की ओर से मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ उनकी मांगों और आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। करीब चली इस बैठक के बाद छात्र नेताओं ने वार्ता को सकारात्मक बताया।

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Jharkhand Protest:झारखंड में JPSC-JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच शनिवार को स्टेट गेस्ट हाउस में अहम बैठक हुई। सरकार की ओर से मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ उनकी मांगों और आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। करीब चली इस बैठक के बाद छात्र नेताओं ने वार्ता को सकारात्मक बताया।सरकार की ओर से छात्रों से बातचीत के लिए गठित पैनल में झामुमो के मंत्री चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह और राजद के संजय शामिल रहे। बैठक में छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में सुधार समेत अपनी प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं।

‘पहली बैठक सकारात्मक रही’

वार्ता समाप्त होने के बाद छात्र नेता रवीन्द्र पासवान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह सरकार के साथ उनकी पहली बैठक थी और बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों ने छात्रों की बातों को गंभीरता से सुना है।

रवीन्द्र पासवान ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और जल्द ही ठोस पहल की जाएगी।
भरोसे का इंतजार, आंदोलन रहेगा जारी
वहीं कोर कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि सरकार के साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन छात्रों को अब सरकार की ओर से ठोस भरोसे का इंतजार है। सरकार के प्रतिनिधियों ने छात्रों की मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की बात कही है।

छात्र नेताओं के मुताबिक, जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट और सकारात्मक आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन और मार्च जारी रहेगा। हालांकि, सरकार की ओर से ठोस भरोसा मिलने की स्थिति में 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के फैसले पर दोबारा विचार किया जा सकता है।

अब निगाहें सरकार की अगली पहल पर टिकी हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि वे आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

रिपोर्ट: सुनील पोद्दार
DNP India, रांची

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