Nana Patekar: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर जिन्होंने अपनी फिल्मों से एक ऐसे साम्राज्य की स्थापना की जिन्हें कभी नहीं भूला जा सकता है। निश्चित तौर पर उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। जी हां हम बात कर रहे हैं नाना पाटेकर की जो इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए हैं। 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनकी मौत बताई जा रही है लेकिन क्या आपको पता है कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दोनों में अंतर होता है। इस दौरान आप यह गलती भूल कर भी ना करें। जाहिर तौर पर नाना पाटेकर का इस दुनिया से जाना लोगों के लिए एक क्षति से कम नहीं है।
कैसे नाना पाटेकर के लिए कार्डियक अरेस्ट बना दुश्मन
इंस्टाग्राम चैनल से शेयर किए गए इस वीडियो में बताया गया कि फिट दिखने वाले एक्टर नाना पाटेकर की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। अगर आपके सामने कोई ऐसा मरीज है जिसे कार्डियक अरेस्ट आया है तो आप उसकी जान कैसे बचा सकते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कि सीपीआर देने से जान बच सकता है।
क्या है हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में सबसे बड़ा अंतर
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में सबसे बड़ा अंतर की बात करें तो हार्ट अटैक में नसें ब्लॉक होती है लेकिन कार्डियक अरेस्ट में दिल धड़कना बंद कर देता है। इंसान अचानक नीचे गिरता है और उसकी सांसे रुक जाती है। खून दिमाग तक पहुंचना बंद हो जाता है। ऐसे में हर सेकंड कीमती होता है और इस दौरान उसकी सिर्फ एक ही चीज जान बचा सकती है वह है सीपीआर।
कैसे CPR से कार्डियक अरेस्ट में बचा सकते हैं जान
वहीं एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि कार्डियक अरेस्ट के तुरंत बाद सबसे पहले इंसान को पीठ के बल लिटा दे। बिना अपनी कोहनी मोड़े मरीज के सीने को बार-बार गहराई तक दबाए। आपकी स्पीड एक सेकंड में दो बार होना चाहिए यानी 1 मिनट में कम से कम 120 बार आपको ऐसे करने की सलाह दी गई है। इससे दिमाग तक खून पहुंचते रहता है। सीपीआर के जरिए जान बचाई जा सकती है।
क्या हुआ था आखिरी पल में Nana Patekar के साथ
इस सबसे हटके अगर बात करें नाना पाटेकर की तो रिपोर्ट में बताया गया कि 75 साल के एक्टर का गोवा के डोना पाउला स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट से निधन हुआ। बताया जा रहा है कि रात करीब 2:30 बजे नाना ने अपने एक दोस्त को मैसेज किया कि उनकी तबीयत खराब हो रही है। वहीं 4 के आसपास जब दोस्त पहुंचे तब वह बेहोश अवस्था में मिले। डॉक्टरों की टीम लगभग 45 मिनट से 1 घंटे तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन उनकी जान नहीं बचा सके।
कार्डियक अरेस्ट के दौरान सीपीआर को अंतिम इलाज माना जाता है जिससे मरीज को बचाया जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।
