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Bronchoscopy: इलाज का मॉडर्न तरीका! जानें क्या है ब्रोंकोस्कोपी और कैसे 14 वर्षीय बच्ची के लिए साबित हुआ मददगार?

Bronchoscopy: तकनीक के इस बढ़ते दौर में इलाज कि विधि भी दिन-प्रतिदिन बदलती नजर आ रही है। इसी क्रम में आज देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित तमिलनाडु के तंजावुर में एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने साढ़े तीन मिनट में ही 14 वर्ष की लड़की के फेफड़े से 4 सेंटीमीटर लंबी सुई निकालकर रिकॉर्ड बनाया है।

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By: Gaurav Dixit

Published: मई 28, 2024 5:24 अपराह्न

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Bronchoscopy: तकनीक के इस बढ़ते दौर में इलाज कि विधि भी दिन-प्रतिदिन बदलती नजर आ रही है। इसी क्रम में आज देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित तमिलनाडु के तंजावुर में एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने साढ़े तीन मिनट में ही 14 वर्ष की लड़की के फेफड़े से 4 सेंटीमीटर लंबी सुई निकालकर रिकॉर्ड बनाया है। डॉक्टर्स की टीम ने जिस चिकित्सा विधि का इस्तेमाल कर लड़की के फेफड़े से सुई निकालने का काम किया है उसे ब्रोंकोस्कोपी कहते हैं।

ब्रोंकोस्कोपी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग मानव शरीर के वायुमार्ग को एक छोटे कैमरे से देखने के लिए किया जाता है जो कि लचीले ट्यूब के अंत में स्थित होता है। इस प्रणाली में डॉक्टर्स लोगों के वायु मार्ग को देखने और तस्वीरें लेने के लिए एक वीडियो स्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं।

ब्रोंकोस्कोपी क्या है?

चिकित्सा प्रणाली के क्षेत्र में बदलते तकनीक के साथ ब्रोंकोस्कोपी प्रकाश में आया। ब्रोंकोस्कोपी चिकित्सा की वो विधि है जिसमे एक पतली ट्यूब होती है जिसके ऊपर एक लाइट और कैमरा लगा होता है। इस ट्यूब को मानव शरीर के फेफड़ों, श्वासनली (श्वसन नली) या गले के अंदर डाला जा सकता है जिससे कि विषम स्थितियों का निदान, मूल्यांकन और कभी-कभी इलाज करने में मदद मिल सके।

ब्रोंकोस्कोपी होने के लगभग 45 मिनट बाद मरीज बेहोशी या एनेस्थीसिया की स्थिति से बाहर आ सकता है।

कब इस्तेमाल होती है ये चिकित्सा प्रणाली?

ब्रोंकोस्कोपी का इस्तेमाल डॉक्टर्स सामान्यत: फेफड़ों की समस्याओं का कारण जानने व आंतरिक परेशानियों का इलाज करने के लिए करते हैं। इस चिकित्सा प्रणाली के तहत फेफड़ों की बीमारी या अत्यधिक खांसी, खून की खांसी या सांस लेने में तकलीफ होना जैसी बिमारी का इलाज किया जा सकता है।

श्वसन नली में रुकावटों का आंकलन करना या उन्हें हटाने के लिए भी ब्रोंकोस्कोपी का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं फेफड़ो में सूजन की स्थिति में या बलगम और ऊतक के नमूने को लेने के लिए भी चिकित्सा प्रणाली ब्रोंकोस्कोपी का इस्तेमाल किया जाता है।

14 वर्षीय बच्ची के लिए साबित हुआ मददगार

इलाज के मॉडर्न तकनीक ब्रोंकोस्कोपी को लेकर आज खूब सुर्खियां बन रही हैं। दरअसल आज चिकित्सा की इस विधि से एक 14 वर्षीय बच्ची की जान बचाई जा सकी है।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने इस संबंध में एक वीडियो जारी किया है जिसमे बताया गया है कि तमिलनाडु के तंजावुर में एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने साढ़े तीन मिनट में ही बिना चाकू का इस्तेमाल किए, 14 साल की लड़की के फेफड़े से 4 सेंटीमीटर लंबी सुई निकाल कर रिकॉर्ड बना दिया। जानकारी के मुताबिक छोटी बच्ची ने कपड़ा पहनते वक्त सुई निगल ली थी। हालाकि चिकित्सकों की देख-रेख में 14 वर्षीय बच्ची को सकुशल बचा लिया गया है और वर्तमान में उसकी हालत स्थिर है।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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