महायुति सरकार में टकराव की वो दस बातें जो Devendra Fadnavis सरकार के गिरने का बन सकती हैं कारण, जानें Eknath Shinde की जगह कौन बन सकता है किंगमेकर?

Eknath Shinde

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Eknath Shinde: इन दिनों महाराष्ट्र में एक वाक्य हर किसी की जुबान पर है। वो है ‘जहां-जहां एकनाथ शिंदे का प्रभाव है, वहां बीजेपी और अजित एक साथ आ रहे हैं…’ राजनीति में दिलचस्पी रखने वाला हर शख्स इसके मायने जानता है। फिलहाल ये बात बिल्कुल सच है कि महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति में बड़ी दरार पड़ रही है। जिसमें बीजेपी, Eknath Shinde की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल है। यहां ये समझना जरूरी है कि राज्य में पिछले साल अक्टूबर महीने में विधानसभा चुनाव हुए थे। इसके बाद से ही सभी के बीच अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद और टकराव की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि कई बार हालात बिगड़ते देख कुछ नेताओं ने सबको नजरअंदाज करते हुए ये कहने की पूरी कोशिश की है कि सब ठीक है। लेकिन महाराष्ट्र से हर दिन आ रही महायुति की खबरों ने देवेंद्र फडणवीस सरकार के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महायुति सरकार टूटती है तो ये होंगे मुख्य कारण:

शिंदे की हर गतिविधि में मिलते हैं ये संकेत

महायुति सरकार में तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। यह पहली बार नहीं है कि शिंदे किसी महत्वपूर्ण बैठक का हिस्सा नहीं रहे हों। दरअसल, इससे पहले भी वह खुलकर अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं। शिंदे को अब समझ आने लगा है कि महाराष्ट्र की राजनीति में उनका अगला कदम किसी कड़ी चुनौती से कम नहीं है। इसमें उनके मौजूदा सहयोगी द्वारा उन्हें दरकिनार करने की लगातार कोशिशों का सामना करना भी शामिल है। इसकी झलक Eknath Shinde के महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठकों में शामिल न होने में भी देखी गई है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि शिंदे भाजपा या अजित पवार द्वारा आयोजित बैठकों से दूरी बनाए रखते रहे हैं। शिंदे स्वतंत्र बैठकें आयोजित करते रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने अपना स्वतंत्र राहत कोष भी संचालित करना शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि वह दिन दूर नहीं जब शिंदे अपने मौजूदा सहयोगी से अलग रास्ता चुन लेंगे। क्योंकि उनका मानना​है कि फिलहाल महायुति में भाजपा और अजित पवार द्वारा शिंदे को दरकिनार करने का रास्ता एक जैसा ही नजर आ रहा है-सूत्र।

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