Tata Sons Controversy: टाटा संस के अध्यक्ष के तौर पर एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं होते इस सबके बीच नोएल टाटा लगातार हमलावर हैं। इस फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए नजर आ रहे हैं। एन. चंद्रशेखरन की एक बार फिर अध्यक्ष को तौर पर नियुक्ति को लेकर कानूनी विवाद भी शुरू हो गया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और क्यों टाटा संस कंट्रोवर्सी फिलहाल सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है। नोएल टाटा ने इसे गैरकानूनी बताया है।
Tata Sons Controversy की क्या है वजह
टाटा संस के बोर्ड की तरफ से एन. चंद्रशेखरन को अगले 5 वर्षों के लिए एक बार फिर से चेयरमैन बनाने की घोषणा की गई। बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के दो प्रतिनिधियों, नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन के वोट अलग-अलग पड़े। इसके बाद हरीश मनवानी ने कास्टिंग वोट देकर फिर से नियुक्ति के पक्ष में फैसला सुनाया जिसे नोएल टाटा और ट्रस्ट्स ने अवैध बताया है और इसे लेकर विवाद जारी है।
क्या लगाया जा रहा नोएल टाटा की तरफ से आरोप
नोएल टाटा के मुताबिक चेयरमैन की नियुक्ति के लिए आर्टिकल 118 लागू होता है न कि आर्टिकल 121 जहां नियम के तहत टाटा ट्रस्ट्स के निदेशकों के बहुमत का समर्थन जरूरी बताया गया है। उन्होंने कहा कि कास्टिंग वोट से इस शर्त को बदला नहीं जा सकता। 2022 की बैठक में भी इसी नियम का पालन किया गया था। इसके अलावा उन्होंने एन. चंद्रशेखरन की उम्र पर भी सवाल उठाया है। नोएल टाटा का आरोप है कि बोर्ड ने इस राय को नजरअंदाज किया है।
नोएल टाटा ने क्या जताई आपत्ति
नोएल टाटा ने कंपनी सचिव को लिखे पत्र में कहा कि बोर्ड में तय हुआ था कि जब तक कानूनी राय और शेयरधारकों की मंजूरी नहीं मिल जाती तब तक इस बात का खुलासा नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद सार्वजनिक बयान जारी करना गैर-जिम्मेदाराना है। इससे शेयरधारकों और बाजार में गलत संदेश जाता है। ऐसे में टाटा संस के अंदर चल रहे यह आंतरिक कलह का आखिर क्या समाधान निकलता है इस पर नज़रें रहने वाली है।
कौन है नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन
नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष हैं। सौतेले भाई रतन टाटा के निधन के बाद उन्हें टाटा ट्रस्ट्स का नया प्रमुख चुना गया था। अक्टूबर 2024 में उन्हें जिम्मेदारी मिली और ट्रस्ट्स के पास टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी ‘टाटा संस’ की 66% हिस्सेदारी है। वहीं टाटा संस के चेयरमैन हैं जो 150 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य वाले पूरे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है।
