Cancer: मोबाइल चलाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है यह तो आप सभी जानते होंगे। सोने से 1 घंटे पहले मोबाइल को दूर रखने की सलाह अक्सर डॉक्टर देते हैं लेकिन क्या वाकई मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होने का खतरा होता है। आखिर क्या है इसके पीछे की वजह। इस बारे में बात करते हुए आइए जानते हैं आखिर डॉक्टर ने क्या कहा जो निश्चित तौर पर आपको जान लेना जरूरी है। दरअसल एक्सपर्ट Dr Anshuman Kaushal MD FACS इस बारे में बात करते हुए नजर आते हैं और कहते हैं कि यह इंटरनेट का सबसे बड़ा झूठ है।
क्या है कैंसर और मोबाइल का कनेक्शन
अपनी बात रखते हुए डॉक्टर कहते हैं कि 2011 में WHO ने मोबाइल रेडिएशन को ग्रुप 2B यानी पॉसिबल कार्सिनोजेनिक कहा था और ऐसे में लोगों ने कैंसर सुना और परेशान होने लगे। एक्सपर्ट के मुताबिक 2B एलोवेरा जूस, अचार, शुगर फ्री टेबलेट जिसे आप चाय या कॉफी में मिलाकर पीते हैं उसमें भी है।
Cancer नहीं लेकिन मोबाइल इस्तेमाल से है ये रिस्क
इसके साथ ही एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि सूर्य की रोशनी 100 से 1000 गुना ज्यादा एनर्जेटिक होते हैं। सनलाइट डीएनए को डायरेक्ट नहीं तोड़ता है जबकि यूवी की किरण ऐसा कर सकती है। एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि अगर आप फोन का इस्तेमाल करने से कैंसर होने का भले ही खतरा नहीं है लेकिन इससे नींद आंख खराब होना और सबसे ज्यादा खतरनाक सड़क दुर्घटना है क्योंकि लोग ड्राइव करते समय फोन का इस्तेमाल करते हैं।
जानिए क्या है मोबाइल के लिए सही टाइमिंग
इस सबके बीच एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि कैंसर के रिस्क से बचने के लिए जरूरी है कि आपका बच्चा और आप कितने घंटे मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में जानिए क्या है सही टाइमिंग।
- 0–2 साल
कोई स्क्रीन नहीं। - 2–5 साल
ज़्यादा से ज़्यादा 1 घंटा हर दिन
सिर्फ़ बड़ों की देखरेख में
खाना खाते समय कोई स्क्रीन नहीं - 5–12 साल
ज़्यादा से ज़्यादा 1–1.5 घंटे
बेडरूम में कोई डिवाइस नहीं
रोज़ाना कम से कम 2 घंटे बाहर खेलना - सभी उम्र के लिए
सोने से 1 घंटा पहले कोई स्क्रीन नहीं
खाना खाते समय कोई फ़ोन नहीं
पढ़ाई के समय कोई फ़ोन नहीं
गाड़ी चलाते समय कार में कोई फ़ोन नहीं
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।
