नर्क जा सकती हूं, पर मांस नहीं छोड़ सकती! वृद्ध महिला की स्थिति सुन हैरत में Premanand Maharaj, नॉनवेज को लेकर कह दी बड़ी बात

Premanand Maharaj के समक्ष एक बिटिया ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उसकी मां नर्क जाने को तैयार हैं, पर मीट नहीं छोड़ रहीं। प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए नॉनवेज छोड़ने के कुछ अचूक उपाय सुझाए हैं जिसे सभी को सुनना चाहिए।

Premanand Maharaj

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Premanand Maharaj: वृद्धावस्था में यदि कोई मांसाहार का सेवन करे, तो ये उसकी व्यक्तिगत पसंद हो सकती है। हालांकि, ऐसी स्थिति में कई संताने अपने अभिवावकों के प्रति चिंतित भाव से परेशान हो जाती है। ऐसी ही एक बिटिया गुरु प्रेमानंद महाराज के दरबार में पहुंची। युवती ने बताया कि उसकी मां नर्क जाने को तैयार हैं, लेकिन मांस खाना नहीं छोड़ रहीं। Premanand Maharaj पहले तो युवती का सवाल सुन आश्चर्यचकित हुए, फिर उन्हें बड़ी करीने से इस सवाल का जवाब दिया। प्रेमानंद महाराज ने नॉनवेज खाने को लेकर ऐसी बात कही है जिसे सभी को सुनना चाहिए।

नॉनवेज का सेवन करने वाली महिला की स्थिति सुन क्या बोले Premanand Maharaj?

भजनमार्ग के आधिकारिक यूट्यूब चैनल से जारी वीडियो में गुरु प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि “ये जवान के स्वाद के लिए दूसरे शरीर धारियों के प्रति हिंसा जायज नहीं है। चाहें वो मुर्गा हो चाहे वो बकरा हो। हर जीव अपने शरीर की रक्षा चाहता है। आप एक चीटी को भी देखो, तो ऐसे करके भागेगी। इन छोटे-छोटे निरीह पशुओं की हत्या करके उसके अंग काटे जाएंगे और फिर तुम जबान से खाओगे तुम्हें अच्छा लगेगा। कैसी मां हो तुम? कैसा तुम्हारा हृदय है कि तुम दूसरे जीवों के शरीरों की हत्या करके उसके मांस खाने के लिए राजी हो। यदि बेटे को एक थप्पड़ कोई मारे, तो उस मां को कितना बुरा लगेगा। ऐसे में किसी मां का बच्चा है बकरा मुर्गा और उसको मारते हैं लोग तो ये सब दुर्गति को प्राप्त होंगे। अपनी जबान को रोको और जीवों के प्रति करुणा भाव लाओ।”

प्रेमानंद महाराज की नॉनवेज खाने वालों से खास अपील

गुरु Premanand Maharaj ने मांसाहार का सेवन करने वालों से खास अपील करते हुए कहा है कि “56 प्रकार के भोग बनते हैं हमारे वैष्णव में। ठाकुर जी को 56 भोग लगाए जाते हैं। जब ठाकुर जी को एक से एक स्वादिष्ट सब्जी एक से एक स्वादिष्ट पदार्थ पसंद है। तो हम यही प्रार्थना करेंगे तुम्हारी मां नर्क में ना जाएं और भजन करें व सात्विक आहार लें। हम कहते हैं कि हिंसा से डरो। अपने कर्म का भोग करना ही है। इसलिए किसी भी जीव को कष्ट मत दो। यदि किसी जीव को कष्ट दोगे तो तुम्हें भोगना पड़ेगा और उसके बदले कष्ट झेलना ही पड़ेगा।”

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