Assembly Elections 2026: पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद दूसरे फेज पर टिकीं नजरें! बंपर वोटिंग देख क्यों घबरा रहा TMC खेमा? समझें

Assembly Elections 2026: बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद दूसरे चरण पर सबकी नजरें टिकीं हैं। बंपर वोटिंग को टीएमसी के लिए चैलेंजिंग फैक्टर माना जा रहा है।

Assembly Elections 2026

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Assembly Elections 2026: सियासत संभावनाओं का खेल है और यही वजह है कि यहां सटीक अंदाजा लगा पाना विशेषज्ञों के लिए मुश्किल हो जाता है। उदाहरण की बात करें तो बीते कल 23 अप्रैल को ही बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुए। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर भी मतदान हो गए। इस दौरान बंपर वोटिंग ने लोगों को चौंका दिया है।

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में जहां 92 फीसदी वोटिंग हुई, तो वहीं तमिलनाडु में 85 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। बंगाल की बात करें तो यहां बंपर वोटिंग देख टीएमसी खेमा में खलबली है। यदि एंटी इन्कमबेंसी पर वोटिंग हुई होगी, तो ममता बनर्जी की सत्ता से विदाई तय है। ये समीकरण सभी को चौंका रहा है।

पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद दूसरे फेज पर टिकीं नजरें!

सूबे की 152 विधानसभा सीटों पर संपन्न हुए मतदान के दौरान मतदाताओं का अति उत्साह नजर आया। पहले चरण में बंगाल में 92 फीसदी वोटिंग हुई है। नंदीग्राम से मुर्शिदाबाद, मालदा, दिनाजपुर, बर्धमान समेत सभी इलाकों में मतदाताओं की लंबी कतारें नजर आईं। मतदाता उत्साह के साथ बढ़-चढ़कर लोकतंत्र के इस महापर्व में शिरकत करते नजर आए।

ममता बनर्जी का गढ़ कहे जाने वाले बंगाल में पहले चरण के दौरान रिकॉर्ड मतदान के बाद दूसरे चरण पर नजरें टिकीं हैं। 29 अप्रैल को शेष बची 142 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। यदि ऐसे ही बंपर वोटिंग दूसरे चरण में भी होती है, तो ये सत्तारुढ़ दल टीएमसी के लिए अच्छा संकेत नहीं है। हालांकि, क्या होगा इसके लिए 4 मई की तारीख का इंतजार ही विकल्प है।

बंपर वोटिंग देख क्यों घबरा रहा TMC खेमा?

तमिलनाडु का समीकरण थोड़ा अलग है। वहां डीएमके मजबूती से चुनावी मैदान में है। चुनावी प्रचार-प्रसार के दौरान भी ऐसा लगा कि सीएम एमके स्टालिन की लोकप्रियता अभी जनता के बीच बरकरार है। हालांकि, बंगाल की स्थिती अलग है। यहां बीजेपी सत्तारुढ़ टीएमसी को कड़ी टक्कर दे रही है। यही वजह है कि पहले चरण के मतदान में बंपर वोटिंग टीएमसी की बेचैनी बढ़ा रही है।

यदि जनता ने 15 वर्ष से सत्ता संभाल रही टीएमसी के खिलाफ एंटी इन्कंबेंसी फैक्टर को साधा होगा, तो ममता बनर्जी की राह मुश्किल हो सकती है। ऐसे में बीजेपी को फायदा मिलना तय माना जा रहा है। यही वजह है कि टीएमसी खेमा में उथल-पुथल देखने को मिली है। अब सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा ये 4 मई को नतीजों की घोषणा के साथ स्पष्ट होगा।

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